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भजन: आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं - Aarti Jagjanni Main Teri Gaaun

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आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं । तुम बिन कौन सुने वरदाती, किस को जा कर विनय सुनाऊं ॥ असुरों ने देवों को सताया, तुमने रूप धरा महामाया । उसी रूप का मैं दर्शन चाहूँ ॥ रक्तबीज मधुकैटब मारे, अपने भक्तों में काज सँवारे । मैं भी तेरा दास कहाऊं ॥ आरती तेरी करू वरदाती, हृदय का दीपक नैयनो की भांति । निसदिन प्रेम की ज्योति जगाऊं ॥ ध्यानु भक्त तुमरा यश गाया, जिस ध्याया, माता फल पाया । मैं भी दर तेरे सीस झुकाऊं ॥ आरती तेरी जो कोई गावे, चमन सभी सुख सम्पति पावे । मैया चरण कमल राज चाहूँ ॥

भजन: मुझे माँ ने बुलाया है - Mujhe Maa Ne Bulaya Hai

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मुझे माँ ने बुलाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है । जगजननी माँ शेरों वाली, मेहरो वाली माँ मेरी । द्वार दया का खोल के बैठी, जग कल्याणी माँ मेरी । तन मन हर्षाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥ ऊँचे पर्वत पर मैया का है सुन्दर दरबार जहाँ । भक्त जानो की सब आशाएं होती हैं स्वीकार यहाँ । सब माँ की माया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥ अपनी खुशिया अपने दुखड़े माँ से सांझे कर लूँगा । माँ के आशीर्वाद से अपनी खाली झोली भर लूँगा । यही मन में समाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥

श्री वैष्णो माता जी की आरती - Shri Vaishno Mata Ji Ki Aarti

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भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,  हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ । हे दरबारा वाली आरती जय माँ । ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ काहे दी मैया तेरी आरती बनावा, काहे दी पावां विच बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । सुहे चोलेयाँ वाली आरती जय माँ । हे माँ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सोने दी आरती बनावा, अगर कपूर पावां बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ कौन सुहागन दिवा बालेया मेरी मैया, कौन जागेगा सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । सच्चिया ज्योतां वाली आरती जय माँ । हे पहाड़ा  वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी अम्बे, ज्योत जागेगी सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ त्रिकुटा रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा, जिस तेरा भवन बनाया, मंदिर विच आरती जय माँ । हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे, जो ध्यावे सो, यो फल पावे, रख बाणे दी लाज, मं...

भजन: प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी - Payara Saja Hai Tera Dvaar Bhawani

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दरबार तेरा दरबारों में, एक ख़ास एहमियत रखता है । उसको वैसा मिल जाता है, जो जैसी नियत रखता है ॥ बड़ा प्यारा सजा है द्वार भवानी । भक्तों की लगी है कतार भवानी ॥ ऊँचे पर्बत भवन निराला । आ के शीश निवावे संसार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥ जगमग जगमग ज्योत जगे है । तेरे चरणों में गंगा की धार, भवानी ॥ तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥ लाल चुनरिया लाल लाल चूड़ा । गले लाल फूलों के सोहे हार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार, भवानी ॥ सावन महीना मैया झूला झूले । देखो रूप कंजको का धार भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥ पल में भरती झोली खाली । तेरे खुले दया के भण्डार, भवानी ॥ तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥ लक्खा को है तेरा सहारा माँ । करदे अपने सरल का बेडा पार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥

भजन: तेरे सदके तू भेज दे बुलावा - Tere Sadke Tu Bhej De Bulava

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जय माता दी, जय माता दी, सारे बोलो जय माता दी । तेरे सदके तू भेज दे बुलावा, दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरा वालिये । मांगू और क्या मैं इस के इलावा, छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरा वालिये ॥ धरती क्या आकाश है क्या सब तेरे इशारों से चलते हैं । चाँद सितारों के दीपक भी तेरे नूर से ही चलते हैं । हम बन्दों की हस्ती क्या है, तेरी दया पर ही पलते हैं । शेरां वाली, महरा वाली, ज्योतां वाली, लाटा वाली ॥ रोता आये, हस्ता जाए, तेरे दर की रीत यही है । नित नित तेरे दर्शन करना, हम भक्तो की प्रीत यही है । जिस को चाहे उसको बुलाये, मैया तेरी रीत यही है । शेरां वाली, महरा वाली, ज्योतां वाली, लाटा वाली ॥

भजन: शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ - Shakti De Maa Shakti De Maa

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शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ । पग पग ठोकर खाऊं, चल ना पाऊं, कैसे आऊं मैं घर तेरे ॥ हाथ पकड़ ले हाथ बढ़ा दे, अपने मंदिर तक पहुंचा दे । सर पर दुःख की रैना, नाही चैना,  प्यासे नैना दर्शन के ॥ जग में जिसका नाम है जीवन, इक युग है संग्राम है जीवन । तेरा नाम पुकारा, दुःख का मारा, हारा माँ इस जीवन से ॥ तेरे द्वारे जो भी आया, उसने जो माँगा वो पाया । मैं भी तेरा सवाली, शक्तिशाली शेरों वाली माँ जगदम्बे ॥

भजन: माँ शारदे माँ शारदे - Maa Shaarde Maa Shaarde

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माँ शारदे, माँ शारदे । ओ मैया हम तो हैं बालक तेरे ॥ तू है दयालु बड़ी माँ वीणा वादिनी । करती दया हो सब पे अम्बे भवानी । वो मैया विद्या का आके हमको भी भण्डार दे ॥ करदो हमारी आज माँ पूरी आशा । कब से है शर्मा तेरे दर्शन का प्यासा । ओ मैया दर्शन हमे भी आ के माँ एक बार दे ॥ मांगे ना लक्खा तुमसे दौलत खजाना । सात सवारों का मुझको अमृत पिलाना । ओ मैया मेरी ही माता के जैसा बस प्यार दे ॥ स्वर: लखबीर सिंह लक्खा

भजन: माँ की हर बात निराली है - Maa Ki Har Baat Niraali Hai

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पास की सुनती है, दूर की सुनती है, गुमनाम के संग संग मशहूर की सुनती है । माँ तो आखिर माँ है माँ के भक्तो, माँ तो हर मजबूर की सुनती है ॥ माँ की हर बात निराली है, बात निराली है, के हर करामात निराली है, महा दाती से सब को मिली सौगात निराली है ॥ वक़्त की चाल बदले, दुःख की जनझाल बदले, इसके चरणों में झुककर, बड़े कंगाल बदले । यहाँ जो आये सवाली, कभी वो जाए न खली, यह लाती पतझर में भी, हर चमन में हरिआली । काली रातो ने लाती प्रभात निराली है ॥ दया जब इसकी होती, तो कंकर बनते मोती, जिसे यह आप जगादे, ना फिर किस्मत वो सोती । गमो से घिरने वाले, बड़े इस माँ ने संभाले, फसे मझदार में बेड़े, इसी में बाहर निकाले । इसकी मीठी ममता की बरसात निराली है ॥ दुःख ताकती है यह, सुख बांटती है जी, हमे पालती है ये दिनरात ही । जादू इसका अजीब, देखो हो के करीब, यह तो बदले नसीब दिन रात ही । इस की रहमत हर निर्दोष के साथ निराली है ॥

भजन: आये तेरे भवन देदे अपनी शरण - Aaye Tere Bhavan Dede Apni Sharan

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आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण, रहे तुझ में मगन, थाम के यह चरण । तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥ उत्सव मनाये, नाचे गाये, चलो मैया के दर जाएँ । चारो दिशाए चार खम्बे बनी हैं, मंडप में आत्मा की चारद तानी है । सूरज भी किरणों की माला ले आया, कुदरत ने धरती का आँगन सजाया । करके तेरे दर्शन, झूमे धरती पवन, सन नन नन गाये पवन, सभी तुझ में मगन, तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥ फूलों ने रंगों से रंगोली सजाई, सारी धरती यह महकायी । चरणों में बहती है गंगा की धरा, आरती का दीपक लगे हर एक सितारा । पुरवैया देखो चवर कैसे झुलाए, ऋतुएँ भी माता का झुला झुलायें । पा के भक्ति का धन, हुआ पावन यह मन, कर के तेरा सुमिरन, खुले अंतर नयन, तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

भजन: ले के पूजा की थाली ज्योत मन की जगाली - Le Ke Pooja Ki Thaali Jyot Man Ki Jagali

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ले के पूजा की थाली, ज्योत मन की जगाली, तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ । तू जो दे दे सहारा, सुख जीवन का सारा, तेरे चरणों पे वारुण, भोली माँ ॥ धूल तेरे चरणों की ले कर माथे तिलक लगाया । यही कामना लेकर मैया द्वारे तेरे मैं आया । रहूँ मैं तेरा हो के, तेरी सेवा में खो के, सारा जीवन गुजारूं, भोली माँ ॥ सफल हुआ यह जनम के मैं था जन्मो से कंगाल । तुने भक्ति का धन देके कर दिया मालोमाल । रहे जब तक यह प्राण, करूँ तेरा ही ध्यान, नाम तेरा पुकारूं, भोरी माँ ॥

भजन: हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम - He Gau Mata Tumhe Pranaam

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हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम ! मंगलदातृ हे गोमाता,  हम सब करते तुम्हें प्रणाम। दूध दही देती कल्याणी,  और असंख्य हैं तेरे नाम॥ कामधेनु है तु सुरभी है,  विश्वरूप तू सुख का धाम। सर्वरूप हैं तेरे जननी,  तीर्थरूप तू श्यामा श्याम॥ वेदों में है कीर्ति छा रही,  अध्न्या भी है तेरा नाम। परम पवित्र तेजमय तू है,  तुष्टि तुष्टिमय तेरा धाम॥ वृन्दावन में कृष्ण कन्हैया,  तुझे पालते आठों याम। दूध दही मक्खन मिश्री से,  खेल खेलते हैं घनश्याम॥ देश हमारा तब कहलाता,  सुख-समृद्धि का शोभा धाम। घी दूध की नदिया बहतीं,  नहीं गरीबी का था नाम॥ वही स्थिति फिर लाने को,  गो सेवाव्रत लें अविराम। गोरक्षा में जान लगा दें,  पूरण होंगे सारे काम॥ हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम !

भजन: हे शिवशंकर नटराजा - He Shiv Shankar Natraja

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हे शिवशंकर नटराजा, मैं तो जनम जनम का दास तेरा । निसदिन करता मैं नाम जपन तेरा, शिव शिव शिव शिव गुंजत मन मोरा । तुम हो मरे प्रभु, तुम ही कृपालु, करूँ समर्पण दीन दयालु ।। तोरी जटा से बहती पवित्रता, तीन्ही लोको के तुम हो दाता । डमरू बजाया, तमस भगाया, जड़ चेतन को तुम्ही ने जगाया ।। अलख निरंजन शिव मोरे स्वामी, तुम ही हो मेरे अंतरयामी । भूल जो कोई हुई है मुझ से, क्षमा मैं मांगू हर पल तुझ से ।। लीला से तेरी डोले यह धरती, करे जो भक्ति देता तू मुक्ति । तांडव नृत्य प्रलय करा के, भव सागर तू पर करादे ।। छवि तेरी है सब से सुन्दर, शशि विराजे तेरी जटा में । हार मणि का शोभे गले में चमके जैसे तारे गगन में ।। स्वर: अनूप जलोटा

भजन: रहमत बरसा देना तू फागुन आया है - Rehmat Barasa Dena Tu Phagun Aaya Hai

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रहमत बरसा देना तू फागुन आया है, गंगा के जल को लाने का मौसम आया है। कंधे पे उठा के जल चलते ही जाना है, जल को ले जा के शिवलिंग पे चढ़ाना है, शिव के द्वारे पे सारा संसार आया है। भोले बाबा तेरी यह जुदाई सही जाए ना, बिन तुझको देखे भोले मुझको चैन आये ना, आजाना तू मेरे पास आया मैं दरबार में, कितनी रात गुजारी है तेरे इंतज़ार में, कैसे बताऊँ ओ भोले नाथ मेरे, मैंने श्रद्धा और मन से तुम्हे ध्याया है, सब कुछ छोड़ के आया मैं, फागुन आया है। भक्ति का नशा यह भोले मन में मेरे छाया है, जो भी आज हूँ मैं, भोले सारी तेरी माया है, अँखियाँ कब से तरस रहीं थी तेरे इस दीदार को, आया तेरे चरणो में, भोले मुझको प्यार दो, अब न कभी तू मुझसे होना जुदा, बड़ी मुश्किल से भोले तुझे पाया है, खुशीआं बरसादेना तू, फागुन आया है।

भजन: ॐ नमः शिवाय शिव संभु का महामंत्र है - Om Namah Shivay Shiv Shambhu Ka Mahamantra Hai

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ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय । शिव संभु का महामंत्र है मुक्ति का उपाय ।। जब जब डोले जीवन नैया, शिव की महिमा गावो, सारे जग के वो है खिवैया, शिव की शरण में आवो, संकट छाये कष्ट रुलाये जब जब जी घबराये, कहो ॐ नमः शिवाये ... सबसे प्यारे सबसे न्यारे बाबा भोले भाले है, भांग धतूरे की मस्ती में रहते मस्त निराले हैं, बम बम भोले कहते जावो जी दम आये जाये, हरी ॐ नमः शिवाय... आधा चंद माथे सोहे गाल सर्पो की माला है, तेज धारी के तेज़ से पाए सूरज चाँद उजाला, डम  डम बोले शिव का डमरू सातो स्वर दोहराये, हरी ॐ नमः शिवाय... विपता आई राम पे भारी शिव शंकर का जाप किया, बजरंगी की शक्ति बनकर राम का शिव ने साथ दिया, रामेश्वर की पूजा करके राम यही फरमाये, हरी ॐ नमः शिवाय...

भजन: अमृत सा तेरा पानी तू नदियों की महारानी हर हर गंगे - Amrit Sa Tera Pani Tu Nadiyo Ki Maharani Har Har Gange

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हर हर गंगे, हर हर गंगे हर हर गंगे  अमृत सा तेरा पानी तू नदियों की महारानी  माँ तू है जग कल्याणी,  हर हर गंगे, हर हर गंगे । भागीरथ के तप से तू पिघली, निकली ब्रह्म कमंडल से । निर्मल रहते पावन होते माँ हम तेरे ही जल से । तेरे जल में जीवन बहता,  मुक्ति का साधन रहता,  मन पुलकित होकर कहता, हर हर गंगे, हर हर गंगे । हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥ गायत्री सी सिद्धि दायनी, गीता जैसा ज्ञान है तू । सारे जग में माँ गंगे इस भारत की पहचान है तू । तू शोभा कैलाशी की,  गरिमा भारतवासी की,  है शान तू ही काशी की, हर हर गंगे, हर हर गंगे । हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥ बही तेरी धारा जिस जिस पथ से वही वही पथ बना तीरथ है । तुझको पाकर धन्य हुए हम अमर हुआ भागीरथ है । कहीं हरिद्वार कहीं संगम,  कहीं गंगा सागर अनुपम,  हर तीरथ तेरा उत्तम, हर हर गंगे, हर हर गंगे । हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥ स्वर: महेन्द्र कपूर

भजन: मेला मेला मेला मेरे भोलेनाथ दा मेला - Mela Mela Mela Mere Bholenath Da Mela

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मेला मेला मेला,  मेरे भोलेनाथ दा मेला । भोलेनाथ दा मेला,  मेरे भोलेनाथ दा मेला ।। मेला मेला मेला,  मेरे भोलेनाथ दा मेला... मेला देखन राम जी आये, सीता जी नू नाल लाये । बजरंगी बन गया चेला, मेरे भोलेनाथ दा मेला ।। मेला देखन श्याम जी आये, राधा जजी नू नाल लाये । सुदामा बसन गया चेला, मेरे भोलेनाथ दा मेला ।। मेला देखन ब्रह्मा जी आये, सरस्वती जी नू नाल लाये । हंस उड्डे अलबेला, मेरे भोलेनाथ दा मेला ।। मेला देखन विष्णु जी आये, लक्षमी जी नू नाल आये । नारद बन गया चेला, मेरे भोलेनाथ दा मेला ।।

भजन: कहानी वैष्णो रानी की - Kahani Vaishno Rani Ki

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कहानी वैष्णो रानी की, कहानी वैष्णो रानी की, कहानी वैष्णो रानी की, कहानी वैष्णो रानी की, तीन पिंडी माँ शेरावाली, कथा भवानी की, कहानी वैष्णो रानी की... जम्मू कटरा में रहते, थे माँ के भक्त निराले, नाम श्रीधर था उनका, मन के थे भोले भाले । रात दिन सांझ सवेरे करते मईया की पूजा, माँ की सेवा से बढ़कर और कोई काम ना दूजा । माता के चरणों में अर्पण, पूरी जिंदगानी की, कहानी वैष्णो रानी की... कन्या के रूप में माँ ने दिया श्रीधर को दर्शन, करो भंडारा माँ का, दे आओ सबको निमंत्रण, सुनी आज्ञा जो माँ की, कहा श्रीधर ने माँ से, आयोजन भंडारे का करूंगा बोलो कहाँ से । मैं निर्धन, औकात नहीं भंडारा कराने की, कहानी वैष्णो रानी की... श्रीधर की लेने परीक्षा मन में ठाना भैरव ने, साधू संतो की टोली चला लेकर वो संग में । सुनले मायावी कन्या, न तेरी माया चलेगी, हाथों से भैरवनाथ के आज तू बच ना सकेगी । चला पकड़ने कन्या को, उसने नादानी की, कहानी वैष्णो रानी की... वीर लांगुर-भैरव में छिड़ा संग्राम भारी, एक महा-बलशाली, दूजा योगी तपधारी । क्रोध में भरकर वैष्णो माँ ने...

भजन: श्री शाकम्भरी माता महामंत्र - Shri Shakambhari Mata Mhamantra

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माँ ब्रह्माणी नमो नमः हे रुद्राणी नमो नमः सकराय वासिनी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते मात सताक्षी नमो नमः दुर्गम विनाशी नमो नमः हे सुख-राशि नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते संकट हारिणि नमो नमः कष्ट निवारिणी नमो नमः माँ भव तारिणी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते हे जग जननी नमो नमः कामना पूर्णि नमो नमः सौम्य रूपणी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते हे परमेश्वरी नमो नमः त्रिपुर सुंदरी नमो नमः हे विश्वेश्वरि नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते दुर्गा रूपेण नमो नमः लक्ष्मी रूपेण नमो नमः विद्या रूपेण नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते भुवन वंदिनी नमो नमः द्वारा निकन्दिनि नमो नमः सिंह वाहिनी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते शक्ति-स्वरूपा नमो नमः हे भव-भूपा नमो नमः अनन्त अनूपा नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते अति सुख दायिनी नमो नमः करुणा नयनी नमो नमः हे वर दायनी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते मंगल करनी नमो नमः अमंगल हरणी नमो नमः अभया वरणी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते सुर धाम निवासिनी नमो नमः हे अविलासिनि नम...

भजन: घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर - Ghanan Ghanan Ghan Ghanta Baje Chamunda Ke Dwar Par

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घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर, रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर। घनन घनन घन घंटा वाजे... निर्मल जल की धारा में पहले आकर इश्नान करो, ज्योत जलाकर मन मंदिर में अंबे माँ का ध्यान धरो। वरदानी से मांगों वर तुम दोनों हाथ पसार कर, रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर। घनन घनन घन घंटा वाजे... शक्ति पीठ यही माँ चलका देव भूमि भी प्यारी है, क्रोध रूप जहां चामुंडा का खप्पर संग कटारी है। दुष्टों की ली बलि जहां पर भागे पापी हारकर, रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर। घनन घनन घन घंटा वाजे... ब्रह्मा वेद सुनाएं इनको विष्णु शंख वजाते हैं, शंकर डमरू वजा वजा कर माँ की महिमा गाते हैं। जय माता की गूँज रही हैं नारद वीणा तार पर, रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर। घनन घनन घन घंटा वाजे... स्वर: नरेन्द्र चंचल

भजन: कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी - Kaise Kroon Teri Pooja Bhavani

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कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी,  कैसे करूँ तेरी पूजा । जल चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो मछली का जूठा भवानी । वो मछली का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... दूध चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो वछडे का जूठा भवानी । वो वछडे का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... फूल चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो भंवरे का जूठा भवानी । वो भंवरे का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... फल चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो पक्षी का जूठा भवानी । वो पक्षी का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... शहिद चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो मखीओं का जूठा भवानी । वो मखीओं का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... धूफ चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो अग्नि का जूठा भवानी । वो अग्नि का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... चंदन चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो सर्पों का जूठा भवानी । वो सर्पों का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा, भवानी... मन चढ़ाऊँ वो नहीं शुद्ध माँ, वो विषयों का जूठा भवानी ।  वो पापों का जूठा, कैसे करूँ तेरी पूजा भवानी... ...