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भजन: आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं - Aarti Jagjanni Main Teri Gaaun

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आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं । तुम बिन कौन सुने वरदाती, किस को जा कर विनय सुनाऊं ॥ असुरों ने देवों को सताया, तुमने रूप धरा महामाया । उसी रूप का मैं दर्शन चाहूँ ॥ रक्तबीज मधुकैटब मारे, अपने भक्तों में काज सँवारे । मैं भी तेरा दास कहाऊं ॥ आरती तेरी करू वरदाती, हृदय का दीपक नैयनो की भांति । निसदिन प्रेम की ज्योति जगाऊं ॥ ध्यानु भक्त तुमरा यश गाया, जिस ध्याया, माता फल पाया । मैं भी दर तेरे सीस झुकाऊं ॥ आरती तेरी जो कोई गावे, चमन सभी सुख सम्पति पावे । मैया चरण कमल राज चाहूँ ॥

श्री वैष्णो माता जी की आरती - Shri Vaishno Mata Ji Ki Aarti

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भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,  हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ । हे दरबारा वाली आरती जय माँ । ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ काहे दी मैया तेरी आरती बनावा, काहे दी पावां विच बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । सुहे चोलेयाँ वाली आरती जय माँ । हे माँ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सोने दी आरती बनावा, अगर कपूर पावां बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ कौन सुहागन दिवा बालेया मेरी मैया, कौन जागेगा सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । सच्चिया ज्योतां वाली आरती जय माँ । हे पहाड़ा  वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी अम्बे, ज्योत जागेगी सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ त्रिकुटा रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा, जिस तेरा भवन बनाया, मंदिर विच आरती जय माँ । हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे, जो ध्यावे सो, यो फल पावे, रख बाणे दी लाज, मं...

श्री काल भैरव जी की आरती - Shri Kal Bhairav Ji Ki Aarti

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जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा । जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥ तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक । भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी । महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी ॥ तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे । चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे ॥ तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी । कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी ॥ पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत । बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत ॥ बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें । कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें ॥

माता पार्वती जी की आरती - Mata Parvati Ji Ki Aarti in Hindi

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।। माता पार्वती जी की आरती ।। जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता ॥ जय पार्वती माता... अरिकुल पद्म विनासनी, जय सेवक त्राता । जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता ॥ जय पार्वती माता... सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा । देव वधू जहं गावत, नृत्य करत ताथा ॥ जय पार्वती माता... सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता। हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता ॥ जय पार्वती माता... शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता । सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा ॥ जय पार्वती माता... सृष्टि रूप तुही है जननी, शिवसंग रंगराता । नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता ॥ जय पार्वती माता... देवन अरज करत हम, चित को लाता। गावत दे दे ताली, मन में रंगराता ॥ जय पार्वती माता... श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता । सदासुखी नित रहता सुख संपत्ति पाता ॥ जय पार्वती माता...

श्री संतोषी माता जी की आरती - Shri Santoshi Mata Ji Ki Aarti in Hindi

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जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपत्ति दाता ॥ जय संतोषी माता... सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हों । हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार कीन्हों ॥ जय संतोषी माता... गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे । मन्द हंसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे ॥ जय संतोषी माता... स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरें प्यारे । धूप दीप मधुमेवा, भोग धरें न्यारे ॥ जय संतोषी माता... गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो । सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो ॥ जय संतोषी माता... शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही । भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥ जय संतोषी माता... मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई । विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ॥ जय संतोषी माता... भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै । जो मन बसै हमारे, इच्छा फल दीजै ॥ जय संतोषी माता... दुखी दरिद्री, रोग, संकट मुक्त किये । बहु धन-धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिये ॥ जय संतोषी माता... ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो । पूजा कथा श्र...

श्री गंगा माता जी की आरती - Shri Ganga Mata Ji Ki Aarti in Hindi

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ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता... चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता... पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता... एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता । यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता... आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता । सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥ ॐ जय गंगे माता... ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता...

श्री गोवर्धन महाराज जी की आरती - Shri Goverdhan Maharaj Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री गोवर्धन महाराज जी की आरती ।। श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज । तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ॥ तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े । तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार ॥ तेरे माथे मुकुट... तेरी सात कोस की परिकम्मा । चकलेश्वर है विश्राम, ओ विश्राम ॥ तेरे माथे मुकुट... तेरे गले में कंठा साज रेहेओ । ठोड़ी पे हीरा लाल, ओ लाल ॥ तेरे माथे मुकुट... तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ । तेरी झांकी बनी विशाल, ओ विशाल ॥ तेरे माथे मुकुट... ।। गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण ।।

श्री सूर्य देव जी की आरती - Shri Surya Dev Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री सूर्य देव जी की आरती ।। जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन । त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन ॥  जय कश्यप-नन्दन... सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी । दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी ॥ जय कश्यप-नन्दन... सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली । अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली ॥ जय कश्यप-नन्दन... सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी । विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी ॥ जय कश्यप-नन्दन... कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा । सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा ॥ जय कश्यप-नन्दन... नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी । वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी ॥ जय कश्यप-नन्दन... सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै । हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै ॥ जय कश्यप-नन्दन...

श्री गणेश जी की आरती - Shri Ganesh Ji Ki Aarti

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जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय गणेश... एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी । माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश... पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश... अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय गणेश... दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी । कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥ जय गणेश... हार चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा । 'सूरश्याम' शरण आए, सुफल कीजे सेवा ॥ जय गणेश... विध्न - हरण मंगल - करण, काटत सकल कलेस । सबसे पहले सुमरिये गौरीपुत्र गणेश ॥

श्री काली माता जी की आरती - Shri Kali Mata Ji Ki Aarti in Hindi

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अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली । तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥ तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पडो माँ, करके सिंह सवारी ॥ सौ सौ सिंहों से तु बलशाली, दस भुजाओं वाली । दुखिंयों के दुखडें निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥ माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता । पूत कपूत सूने हैं पर, माता ना सुनी कुमाता॥ सब पर करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली । दुखियों के दुखडे निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥ नहीं मांगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना । हम तो मांगे माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना ॥ सबकी बिगडी बनाने वाली, लाज बचाने वाली । सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ Ambe tu hai jagdambe kali, jai durge khappar wali tere hi gun gaayen bharti, o maiya ham sab utare teri aarti tere bhakt jano pe mata, bheer padi hai bhari danav dal par toot pado maa, karke sinh sawari sau sau sinho se tu balashali, das bhujaon wali dukhiyo ke dukhade...

श्री शनि देव जी की आरती - Shri Shani Dev Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री शनि देव जी की आरती ।। जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी । सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥  जय जय... श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी । नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥  जय जय... क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी । मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥  जय जय... मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी । लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥  जय जय... देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी । विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥  जय जय...

श्री सत्यनारायण जी की आरती - Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री सत्यनारायण जी की आरती ।। जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ जय लक्ष्मी... रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे । नारद करत निरंजन, घण्टा ध्वनि बाजे ॥ जय लक्ष्मी... प्रकट भये कलिकारण, द्विज को दरस दियो । बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥ जय लक्ष्मी... दुर्बल भील कठियारो, जिन पर कृपा करी । चन्द्रचूढ़ एक राजा, तिनकी विपत हरी ॥ जय लक्ष्मी... वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीनी । सो फल भोग्यो प्रभु जी, फिर स्तुति किन्ही ॥ जय लक्ष्मी... भाव भक्ति के कारण, छिन - छिन रूप धरयो । श्रद्धा धारण कीनी, तिनके काज सरयो ॥ जय लक्ष्मी... ग्वाल बाल संग राजा, वन में भक्ति करी । मनवांछित फल दिन्हो, दीनदयाल हरी ॥ जय लक्ष्मी... चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा । धूप दीप तुलसी से, राजी सत्य देवा ॥ जय लक्ष्मी... श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥ जय लक्ष्मी...

श्री लक्ष्मी जी की आरती - Shri Laxmi Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री लक्ष्मी जी की आरती ।। महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी । हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... उमा रमा ब्रम्हाणी, तुम ही जग माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता । जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता । कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की दाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... जिस घर तुम रहती, तहँ सब सदगुण आता । सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता । खान पान का वैभव, सब तुम से आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... शुभ गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता । रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता... धुप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो । ज्ञान प्रकाश करो माँ, मोह अ...

श्री कुंज बिहारी जी की आरती - Shri Kunj Bihari Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री कुंज बिहारी जी की आरती ।। आरती कुंजबिहारी की । श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुण्डल झलकाला नन्द के नन्द श्री आनंद कंद मोहन बृज चंद राधिका रमण बिहारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की... गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक कस्तूरी तिलक चंद्र सी झलक ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की... कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं । गगन सों सुमन रासि बरसै बजे मुरचंग मधुर मिरदंग ग्वालिन संग अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की... जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा । स्मरन ते होत मोह भंगा बसी सिव सीस जटा के बीच हरै अघ कीच चरन छवि श्री बनवारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की... चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू । चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हंसत मृदु मंद चांदनी चंद कटत भव फंद टेर सुन दीन भिखारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की... ...

श्री शिरडी के साई बाबा जी की आरती - Shri Shirdi Ke Sai Baba Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री शिरडी के साई बाबा जी की आरती ।। आरती श्री साईं गुरुवर की । परमानन्द सदा सुरवर की ॥ जाकी कृपा विपुल सुखकारी । दुःख, शोक, संकट, भयहारी ॥ शिरडी में अवतार रचाया । चमत्कार से तत्व दिखाया ॥ कितने भक्त चरण पर आये । वे सुख शान्ति चिरंतन पाये ॥ भाव धरे जो मन में जैसा । पावत अनुभव वो ही वैसा ॥ गुरु की उदी लगावे तन को । समाधान लाभत उस मन को ॥ साईं नाम सदा जो गावे । सो फल जग में शाश्वत पावे ॥ गुरुवासर करि पूजा - सेवा । उस पर कृपा करत गुरुदेवा ॥ राम, कृष्ण, हनुमान रूप में । दे दर्शन, जानत जो मन में ॥ विविध धर्म के सेवक आते । दर्शन कर इच्छित फल पाते ॥ जै बोलो साईं बाबा की । जै बोलो अवधूत गुरु की ॥ साई की आरती जो कोई गावे । घर में बसि सुख, मंगल पावे ॥

श्री खाटू श्याम बाबा जी की आरती - Shri Khatu Shyam Baba Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री खाटू श्याम बाबा जी की आरती ।। ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे । खाटू धाम विराजत, अनुपम रुप धरे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे । तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे । खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... मोदक खीर चुरमा, सुवरण थाल भरे । सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... झांझ कटोरा और घड़ि़यावल, शंख मृदंग धुरे । भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे । सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... श्री श्याम बिहारीजी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत भक्त - जन, मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे । निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे... ।। ॐ श्री श्याम देवाय नमः ।।

Shree Saraswati Mata Ji Ki Arati in English

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।।  Shree Saraswati Mata Ji Ki Aarti  ।। Kajjal purit lochan bhaare, Stan yug shobhit mukt hare Veena pustak ranjit haste, Bhagawati bharati devi namaste Jai saraswati mata, Maiya jai saraswati mata Sadgun vaibhav shalini, tribhuvan vikhyata Jai saraswati mata... Chandravadani padamasini, Ghuti mangalakari Sohen shubh hans sawari, Atul tejadhari Jai saraswati mata... Baayen kar mein veena, Daayen kar mein mala Shish mukut mani sohe, gal motiyan mala Jai saraswati mata... Devi sharan jo aayen, Unaka uddhaar kiya Paithi manthara dasi, raavan sanhar kiya Jai saraswati mata... Vidhya gyaan pradayini, Gyan prakash bharo Moh aur agyan timir ka, Jag se nash karo Jai saraswati mata... Dhoop deep phal meva, Maa sweekar karo Gyan chakshu de mata, Bhav se uddhaar karo Jai saraswati mata... Maa saraswati ji ki arati jo koi nar gave Hitakari, sukhakari gyan bhakti pave Jai saraswati mata...

श्री सरस्वती माता जी की आरती - Shri Saraswati Mata Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री सरस्वती माता जी की आरती ।। कज्जल पुरित लोचन भारे, स्तन युग शोभित मुक्त हारे । वीणा पुस्तक रंजित हस्ते, भगवती भारती देवी नमस्ते ॥ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता । सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥ जय सरस्वती माता... चंद्रवदनि पदमासिनी, घुति मंगलकारी । सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय सरस्वती माता... बायें कर में वीणा, दायें कर में माला । शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ॥ जय सरस्वती माता... देवी शरण जो आयें, उनका उद्धार किया । पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ जय सरस्वती माता... विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो । मोह और अज्ञान तिमिर का, जग से नाश करो ॥ जय सरस्वती माता... धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो । ज्ञानचक्षु दे माता, भव से उद्धार करो ॥ जय सरस्वती माता... माँ सरस्वती जी की आरती जो कोई नर गावे । हितकारी, सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे ॥ जय सरस्वती माता...

Shri Ramayan Ji Ki Aarti in English

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।।  Shri Ramayan Ji Ki Aarti  ।। Aarti shri ramayan ji ki Kirti kalit lalit siya pi ki Gavat brahmadik muni narad Valmiki bigyan bisarad Suk sanakadi sesh aru sarad Barani pavanasut kirti niki - 1 Gavat bed puran ashtadas Chhao sastra sab granthan ko ras Muni jan dhan santan ko sarabas Sar ans sammat sabahi ki - 2 Gavat santat sambhu bhavani Aru ghatasambhav muni bigyani Byas aadi kabibarj bakhani Kagabhusundi garud ke hi ki - 3 Kalimal harani bishay ras phiki Subhag singar mukti jubati ki Dalan rog bhav moori ami ki taat maat sab bidhi tulasi ki - 4 Bolo Siyavar Ramachandra Ki Jai Pawansut Hanuman Ki Jai

श्री रामायण जी की आरती - Shri Ramayan Ji Ki Aarti in Hindi

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।। श्री रामायण जी की आरती ।। आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥ सुक सनकादि सेष अरु सारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥१॥ गावत बेद पुरान अष्टदस । छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥ मुनि जन धन संतन को सरबस । सार अंस संमत सबही की ॥२॥ गावत संतत संभु भवानी। अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥ ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी । कागभुसुंडि गरुड़ के ही की ॥३॥ कलिमल हरनि बिषय रस फीकी । सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥ दलन रोग भव मूरि अमी की । तात मात सब बिधि तुलसी की ॥४॥ बोलो सियावर रामचन्द्र की जय । पवनसुत हनुमान की जय ॥