भजन: गूंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारों से - Goonj Uthi Yah Dharati Sari Gauraksha Ke Naron Se
॥ श्रीसुरभ्यै नमः ॥
गुंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गौओ के हत्यारों से-2
कहाँ छूपे यदुवंशी सारे झट अपना मुख दिखलाओ,
वीर पाण्डवों की संतानों फिर मैदानों में आओ,
गौमाता के प्राण बचाओ, इन पापी गद्दारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गौओ के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारो से-2
कहाँ गई वो परशुराम की इकलौती संताने,
कहाँ गये वो हल्दी घाटी के महाराणा मस्ताने,
कहाँ गयी वो वीर रमणीया जो खेली अंगारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गौओ के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारो से-2
जाग उठो हे वीर मराठों दुश्मन को अब ललकारो।
गौमाता के प्राण बचाओ हे पंजाबी सरदारों।
दिल्ली की गलियाँ गुंजा दो, अपनी तेज हुँकारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गौओ के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारो से-2
जगतगुरू के सपने को अब सच्चा कर दिखलाओ,
इतिहासों के पन्नों पर तुम काला दाग न लगवाओ,
गौरक्षा की भीख मांगता भंवर हिन्द रखवालों से,
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गौओ के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारो से-2
॥ वन्दे धेनुमातरम् ॥

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