भगवान और एक बालक - The God And a Child (माँ-बाप से बढ़कर कुछ नही)

एक बालक अपने माँ-बाप की खूब सेवा किया करता था। उसके दोस्त उससे कहते कि अगर इतनी सेवा तुमने भगवान की की होती तो तुम्हे भगवान मिल जाते। लेकिन इन सब चीजो से अनजान वो अपने माता पिता की सेवा करता रहा।

एक दिन उसकी माँ बाप की सेवा-भक्ति से खुश होकर भगवान धरती पर आ गये। उस वक्त वो बालक अपनी माँ के पाँव दबा रहा था। भगवान दरवाजे के बाहर से बोले- "दरवाजा खोलो बेटा मैं तुम्हारी माता-पिता की सेवा से प्रसन्न होकर तुम्हे वरदान देने आया हूँ।" बालक ने कहा- "इंतजार करो प्रभु, मैं माँ की सेवा मे लगा हूँ।"

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भगवान बोले- "देखो मैं वापस चला जाऊँगा।" बालक ने कहा- "आप जा सकते है भगवान, मैं सेवा बीच मे नही छोड़ सकता।" कुछ देर बाद उसने दरवाजा खोला तो क्या देखता है भगवान बाहर खड़े थे। भगवान बोले- "लोग मुझे पाने के लिये कठोर तपस्या करते है पर मैं तुम्हे सहज ही मे मिल गया पर तुमने मुझसे प्रतीक्षा करवाई।" बालक ने जवाब दिया- "हे ईश्वर जिस माँ बाप की सेवा ने आपको मेरे पास आने को मजबूर कर दिया उन माँ बाप की सेवा बीच मे छोड़कर मैं दरवाजा खोलने कैसे आता।"

यही इस जिंदगी का सार है। जिंदगी मे हमारे माँ-बाप से बढ़कर कुछ नही है। हमारे माँ-बाप ही हमे ये जिंदगी देते है। यही माँ-बाप अपना पेट काटकर बच्चो के लिये अपना भविष्य खराब कर देते है इसके बदले हमारा भी ये फर्ज बनता है कि हम कभी उन्हे दुःख ना दे। चाहे परिस्थिति जो भी हो, प्रयत्न कीजियेगा उनकी आँखो मे आँसू कभी ना आये।

।। जय श्री श्याम  ।।



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