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क्यों होते हैं शादी कार्ड पर श्री गणेश विराजमान - Why is Shri Ganesh on marriage card?

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श्री गणेश पूजा अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति, स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो। जब कभी किसी व्यक्ति को किसी अनिष्ट की आशंका हो या उसे शारीरिक या आर्थिक कष्ट उठाने पड़ रहे हो तो ऐसे में उसे श्री गणेश की आराधना करने को कहा जाता है।  श्री गणेश को सभी दुखों को हरने वाला या दुखहर्ता माना गया है। श्री गणेश बुद्धि के देवता हैं। इसीलिए श्री गणेश प्रथम पूज्य है यानि हर शुभ कार्य में गणेशजी की पूजा सबसे पहले की जाती है क्योंकि उनके स्वरूप में अध्यात्म और जीवन के गहरे रहस्य छुपे हैं। जिनसे हम जीवन प्रबंधन के सफल सूत्र हासिल कर सकते हैं। इसी तरह श्री गणेश की छोटी आंखें मानव को जीवन में सूक्ष्म दृष्टि रखने की प्रेरणा देती हैं। उनकी बड़ी नाक (सूंड) दूर तक सूंघने में समर्थ है जो उनकी दूरदर्शिता को बताती है। जिसका अर्थ है कि उन्हें हर बात का ज्ञान है। श्री गणेश के दो दांत हैं एक पूर्ण व दूसरा अपूर्ण। पूर्ण दांत श्रद्धा का प्रतीक ह...

हम रामकथा क्यों सुने ? Why do we listen Ram Katha?

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रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥ रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ भावार्थ :- श्री रामचन्द्रजी की कथा हाथ की सुंदर ताली है, जो संदेह रूपी पक्षियों को उड़ा देती है। फिर रामकथा कलियुग रूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी है। हे गिरिराजकुमारी! तुम इसे आदरपूर्वक सुनो॥ राम कथा और भगवान कथा की महिमा - बंधुओं, भगवान श्री राम ने कुछ ही जीवों का उद्धार किया होगा। हजारों, लाखों का। लेकिन भगवान श्री राम की कथा  तो आज भी करोड़ों लोगो का उद्धार कर रही है। राम कथा सुनो , कृष्ण कथा सुनो, हरी कथा सुनो, शिव कथा सुनो आपके जो भी इष्ट देव है उनकी कथा सुनों, क्योंकि इस धरती पर अगर वास्तव में कुछ सुनने के लिए है तो वो है सिर्फ भगवान की कथा। और जिसने सुनी हैं तो दोबारा सुनो। राम चरित्र को जीवन में धारण करने की कोशिश करो। यदि कोई कहे की हमने रामायण पढ़ ली हैं। देखिये तुलसीदास जी कितना सुंदर कह रहे हैं- राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं॥ जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहिं निरंतर तेऊ॥ भावार्थ :- श्री रामजी के चरित्र सुनते-सुनते जो तृप्त हो ...

क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा ? - Why do Worship Lord Ganesha ?

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क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा? भगवान गणेश को सभी अच्‍छे गुणों और सफलताओं का देवता माना जाता है इसीलिए लोग हर अच्‍छे काम को करने से पहले गणेश जी की पूजा करना शुभ मानते हैं। भगवान गणेश के जन्‍मदिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग, आध्‍यात्मिक शक्ति के लिए, कार्य सिद्धि के लिए और लाभ प्राप्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन धूमधाम से करते है। भगवान गणेश को सभी दुखों का हर्ता, संकट दूर करने वाला,  सदबुद्धि देने वाला माना जाता है। उनकी पूजा करने से आध्‍यात्मिक समृद्धि मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती है।  भगवान गणेश के हर रूप की पूजा, विशिष्‍ट व्‍याख्‍या प्रदान करती है। भगवान गणेश की पूजा करने वाले लोगों के कई मत होते है। लोगों द्वारा भगवान गणेश की पूजा सर्वप्रथम करने और उसके पीछे के कारणों को जानना बेहद रोचक होता है। आज हम आपको कुछ महत्‍वपूर्ण और रोचक तथ्‍य बता रहे हैं कि किसी भी समारोह, उत्‍सव या अनुष्‍ठान में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्‍यों की जाती है? बाधाओं को दूर करते हैं हिंदू धर्म के सभी अनुयायियों का मानना है कि किसी भी नए का...

यहां है रावण के मूत्र से बना तालाब - Here is Urine Pond of Raavan

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रावण भगवान भोलेनाथ का भक्त था यह तो सभी जानते हैं लेकिन रावण की भक्ति बड़ी ही विचित्र थी। वह भगवान भोलेनाथ को अपनी भक्ति की सीमा में बांधकर रखना चाहता था। इसके लिए रावण ने कई उपाय किए पर भगवान भोलेनाथ भला एक के होकर कैसे रह सकते थे इसलिए रावण का हर दांव खाली गया। जब रावण निराश होकर अपने सिर की बलि चढ़ाने लगा तो शिव प्रकट हुए और रावण के साथ लंका जाने के लिए तैयार हो गए। लेकिन शर्त रख दी कि मैं तुम्हारे साथ लिंग रूप में चलूंगा। यह लिंग तुम जहां रख दोगे मैं वहीं पर विराजमान हो जाउंगा। रावण को अपने बाहु बल का बड़ा अभिमान था उसने सोचा कि शिवलिंग कितना भारी होगा इसे उठाकर में सीधा लंका ले जाऊंगा, यही सोचकर इसने शिव जी की शर्त झट से स्वीकार कर ली। भगवान विष्णु ने देखा कि रावण शिव जी को लेकर लंका जा रहा है तो उन्हें जगत की चिंता सताने लगी। भगवान विष्णु बालक के रूप में रावण के सामने प्रकट हो गए। इसी समय रावण को लघु शंका लगी और उसने बालक बने विष्णु से अनुरोध किया कि शिवलिंग को अपने हाथों में थाम कर रखे, जब तक कि वह लघु शंका करके आता है। रावण के पेट में गंगा समा गयी थी इसलिए ...

शंख से क्यों नहीं चढ़ाते शिवलिंग पर जल ? - Why Not Give Water by Conch Shells on Shivling

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भगबान के पूजन कार्य में शंख का उपयोग महत्वपूर्ण होता है। लगभग सभी देवी-देवताओं को शंख से जल चढ़ाया जाता है लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। आखिर क्यों शिवजी को शंख से जल अर्पित नहीं करते है। इस संबंध में शिवपुराण में वर्णन मिलता है। -: शिवपुराण की कथा :- शिवपुराण के अनुसार शंखचूड नाम का महापराक्रमी दैत्य हुआ। शंखचूड दैत्यराम दंभ का पुत्र था। दैत्यराज दंभ को जब बहुत समय तक कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई तब उसने भगवान विष्णु के लिए कठिन तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर विष्णु प्रकट हुए। विष्णुजी ने वर मांगने के लिए कहा तब दंभ ने तीनों लोको के लिए अजेय एक महापराक्रमी पुत्र का वर मांगा। श्रीहरि तथास्तु बोलकर अंतध्र्यान हो गए। तब दंभ के यहां एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम शंखचूड़ पड़ा।  शंखचुड ने पुष्कर में ब्रह्माजी के निमित्त घोर तपस्या की और उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा ने वर मांगने के लिए कहा तब शंखचूड ने वर मांगा कि वो देवताओं के लिए अजेय हो जाए। ब्रह्माजी ने तथास्तु बोला और उसे श्रीकृष्ण कवच दिया। साथ ही ब्रह्मा ने शंखचूड को धर्मध्वज की कन्या तुल...

आखिर क्यों हुआ भगवान श्री कृष्ण और शिव जी का भयंकर युद्ध - Shri Krishna and Shiva Ji Frightful War

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दानवीर दैत्यराज बलि के सौ प्रतापी पुत्र थे। उनमें सबसे बड़ा वाणासुर था। वाणासुर ने भगवान शंकर की बड़ी कठिन तपस्या की। शंकर जी ने उसके तप से प्रसन्न होकर उसे सहस्त्र बाहु तथा अपार बल दे दिया। उसके सहस्त्र बाहु और अपार बल के भय से कोई भी उससे युद्ध नहीं करता था। इसी कारण से वाणासुर अति अहंकारी हो गया।  बहुत काल व्यतीत हो जाने के पश्चात् भी जब उससे किसी ने युद्ध नहीं किया तो वह एक दिन शंकर भगवान के पास आकर बोला, "हे चराचर जगत के ईश्वर! मुझे युद्ध करने की प्रबल इच्छा हो रही है किन्तु कोई भी मुझसे युद्ध नहीं करता। अतः कृपा करके आप ही मुझसे युद्ध करिये।" उसकी अहंकारपूर्ण बात को सुन कर भगवान शंकर को क्रोध आया किन्तु वाणासुर उनका परम भक्त था इसलिये अपने क्रोध का शमन कर उन्होंने कहा, "रे मूर्ख! तुझसे युद्ध करके तेरे अहंकार को चूर-चूर करने वाला उत्पन्न हो चुका है। जब तेरे महल की ध्वजा गिर जावे तभी समझ लेना कि तेरा शत्रु आ चुका है।" वाणासुर की उषा नाम की एक कन्या थी। एक बार उषा ने स्वप्न में श्री कृष्ण के पौत्र तथा प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध को देखा और उस पर मोह...

क्यों नहीं जलाई जाती बांस की लकड़ी ? - Why Not Burn Bamboo Wood ?

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क्या आपको पता है कि अर्थी में इस्तेमाल होने के बाद भी चिता में  क्यों नहीं जलाई जाती बांस की लकड़ी ? मृत्यु संस्कार कार्यों में लाश को रखने के लिए "अर्थी"  में तो इस लकड़ी को प्रयोग किया जाता है  लेकिन जलाते समय उसे हटा दिया जाता है। यकीन मानिए इसका वैज्ञानिक कारण बेहद भयभीत करने वाला है, जो शायद ही कभी आपने सोचा हो। शास्त्रों में भी वृक्षों की रक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।  वृक्षों की पूजा इसका उदाहरण है, लेकिन चंदन आदि सुगंधित वृक्षों की लकड़ियां  कुछ विशेष कार्यों या मतलब से जलाने की बात कही गई है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि शास्त्रानुसार बांस की लकड़ी जलाना विशेष रूप से वर्जित है। ऐसा करना भारी पितृ दोष देने वाला माना गया है।  बांस की लकड़ी पर्यावरण संतुलन में आम वृक्षों की तरह ही उपयोगी है। मजबूत होने के कारण इसे फर्नीचर तथा कई प्रकार के सजावटी सामानों में भी उपयोग किया जाता है। इसे जलाना आम पेड़ों से ज्यादा खतरनाक क्यों है? आपको जानकर हैरानी होगी कि बांस की लकड़ी में "लेड"  और कई प्रकार के भारी धातु होते हैं जो जलने क...

जानिए मंदिर के बाहर चप्पल उतारने के वैज्ञानिक कारण - Know Scientific Reasons For Slippers Outside The Temple

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मंदिर के बाहर चप्पल क्यों उतारते हैं? मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है। इसके अलावा एक कारण यह भी है कि मंदिर में गंदगी ना फैले इसलिए जूते चप्पलों को बाहर उतारने का नियम है। *********** दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण- आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है। *********** मंदिर में घंटा लगाने का  वैज्ञानिक  कारण- जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंट...