Posts

Showing posts with the label Ram

हम रामकथा क्यों सुने ? Why do we listen Ram Katha?

Image
रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥ रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ भावार्थ :- श्री रामचन्द्रजी की कथा हाथ की सुंदर ताली है, जो संदेह रूपी पक्षियों को उड़ा देती है। फिर रामकथा कलियुग रूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी है। हे गिरिराजकुमारी! तुम इसे आदरपूर्वक सुनो॥ राम कथा और भगवान कथा की महिमा - बंधुओं, भगवान श्री राम ने कुछ ही जीवों का उद्धार किया होगा। हजारों, लाखों का। लेकिन भगवान श्री राम की कथा  तो आज भी करोड़ों लोगो का उद्धार कर रही है। राम कथा सुनो , कृष्ण कथा सुनो, हरी कथा सुनो, शिव कथा सुनो आपके जो भी इष्ट देव है उनकी कथा सुनों, क्योंकि इस धरती पर अगर वास्तव में कुछ सुनने के लिए है तो वो है सिर्फ भगवान की कथा। और जिसने सुनी हैं तो दोबारा सुनो। राम चरित्र को जीवन में धारण करने की कोशिश करो। यदि कोई कहे की हमने रामायण पढ़ ली हैं। देखिये तुलसीदास जी कितना सुंदर कह रहे हैं- राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं॥ जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहिं निरंतर तेऊ॥ भावार्थ :- श्री रामजी के चरित्र सुनते-सुनते जो तृप्त हो ...

भजन: खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा - Khush honge hanuman ram ram kiye ja

Image
सुबह शाम आठो याम यहीं नाम लिए जा खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा लिखा था राम नाम वो, पथ्थर भी तर गए किए राम से जो बैर, जीते जी वो मर गए बस नाम का रसपान, ए इंसान किए जा खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा राम नाम की धुन पे नाचे हो कर के मतवाला बजरंगी सा इस दुनिया में कोई ना देखा भाला जो भी हनुमत में दर पे आता, उसका संकट ताला मुख में राम, तन में राम, जापे राम राम की माला जहाँ राम का कीर्तन वही हनुमान जति हो गोदी मे गणपति को लें शिव पार्वती हो सियाराम की कृपा से सौ साल जिए जा खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा जिसपे दया श्री राम की, बाका न बाल हो उसका सहाय ‘लक्खा’ अंजनी का लाल हो ‘राजपाल’ तू हर हाल में जैकार किए जा खुश होंगे हनुमान राम राम किए जा स्वर: लखबीर सिंह लक्खा Subah shaam aatho yaam yaheen naam lie ja khush honge hanumaan raam raam kie ja likha tha raam naam vo, paththar bhee tar gae kie raam se jo bair, jeete jee vo mar gae bas naam ka rasapaan, e insaan kie ja khush honge hanumaan raam raam kie ja raam naam kee dhun pe naache ho kar ke matava...

भजन: आज्ञा नहीं है माँ मुझे किसी और काम की - Aagya nahi hai maa mujhe kisi aur kaam ki

Image
-: दोहा :- न पल मे यु महान न होते, गदा हाथ लिये बलवान न होते। न विजय श्रीराम की होती, अगर पवनपुत्र हनुमान न होते।। आज्ञा नहीं है माँ मुझे, किसी और काम की, वरना भुजाएँ तोड़ दू, सौगंध राम की। लंका पाताल ठोक दू, रावण के शान की, जिन्दा जमी मे गाढ़ दू, सौगंध राम की। ना झूठी शान करू, ना अभिमान करू, प्रभु का ध्यान धरु, राम गुण गान करू। सच्चे दया के धाम है वो, रघुकुल की शान है, बल हु मै बल के धाम है वो, सौगंध राम की। विश्वास करलो माँ मेरी, आयेंगे राम जी, रावण को मार कर तुम्हे, ले जायेंगे राम जी। तब तक न खोना धैर्य माँ, तुम्हे सौगंध राम की। रावण को मार कर प्रभु , बैठे विमान पर, बोली यु सीता कर कृपा, अंजनी के लाल पर। लहरी कहा जो कर दिया, सौगंध राम की। -: Doha :- na pal me yu mahaan na hote, gada haath liye balavaan na hote. na vijay shreeraam kee hotee, agar pavanaputr hanumaan na hote. aagya nahin hai maan mujhe, kisee aur kaam kee, varana bhujaen tod doo, saugandh raam kee. lanka paataal thok doo, raavan ke shaan kee, jinda jamee me gaadh doo, sau...

भजन: राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे - raja raavan apni moonch thodi nichi kar le re

Image
राम शरण में ले चालूं मेरी पूछ पकड़ ले रे, राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे। राजा हो कर चोरी सीखी, इज्जत करदी ख़ाक, भूल गयो के तेरी बहन की लक्षमण काटी नाक। थोड़ा दिन की बात है रावण खूब अकड़ ले रे राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे॥ सीता माता ने हर लायो करके धोखा बाजी, बाली से तू लुकतो डोले किथे गयी रंग बाजी। बच न सकेगा रावण जितना पाँव पटक ले रे, राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे॥ बनवारी कछु साधू मारेआ होयो बड़ो बलवान, रिश्तेदारां से मिलने बस कुछ दिन का महमान। रावण क्यों बेमौत मरे मेरी बात समझ ले रे, राजा रावण अपनी मूछ थोड़ी नीची कर के रे॥ स्वर: जया किशोरी जी raam sharan mein le chaaloon meree poochh pakad le re, raaja raavan apanee moochh thodee neechee kar ke re. raaja ho kar choree seekhee, ijjat karadee khaak, bhool gayo ke teree bahan kee lakshaman kaatee naak. thoda din kee baat hai raavan khoob akad le re raaja raavan apanee moochh thodee neechee kar ke re. seeta maata ne har laayo karake dhokha baaje...

भजन: भज गोविन्द गोविन्द गोपाला - Bhaj Govind Govind Gopala

Image
भज गोविन्द गोविन्द गोपाला,  भज मुरली मनोहर नन्द लाला । प्यारे मुकुंद माधव गोविन्द बोल, हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल । हरे रामा रामा राम, सीता राम राम राम, सीता राम राम राम, राधे श्याम श्याम श्याम । भज गोविन्द गोविन्द गोपाला, भज मुरली मनोहर नन्द लाला । राम धुन लागि रे गोपाल धुन लागि, लागि रे मोहे राधे धुन लागि । भज गोविन्द गोविन्द गोपाला, भज मुरली मनोहर नन्द लाला । भज गोविन्द गोविन्द गोपाला, भज मुरली मनोहर नन्द लाला । प्यारे मुकुंद माधव गोविन्द बोल, हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल ।

भजन: पत्थर की राधा प्यारी पत्थर के कृष्ण मुरारी - Patthar Ki Radha Pyari Patthar Ke Krishna Murari

Image
पत्थर की राधा प्यारी, पत्थर के कृष्ण मुरारी, पत्थर से पत्थर घिस के पैदा होती चिंगारी, पत्थर की नार अहिल्या, पग से श्री राम ने तारी, पत्थर के मठ में बैठी, मैया हमारी । चौदह बरस वनवास में भेजा, राम लखन सीता को, पत्थर रख सीने दशरथ ने, पुत्र जुदाई का भी पत्थर सहा देवकी माँ ने, कैसी लीला रची कुदरत ने, पत्थर धन्ने को मिला, जिसमे ठाकुर बसा, पत्थर के जगह जगह पर भोले भंडारी । नल और नील जो लाए पत्थर, राम लिखा पत्थर पे, पत्थर पानी बीच बहाए, तैर गए पत्थर पानी में राम सेतु के आए, मेरे राम बहुत हर्षाये, पत्थर जग में महान, इसको पूजे जहान, इसकी तो पूजा करती यह दुनिया सारी । ले हनुमान उड़े जब पत्थर संजीवनी ले आये, सारे वीर पुरुष हर्षाये, वो ही पत्तर बृज भूमि में गोवर्धन कहलाये, जो है ऊँगली बीच उठाये, मंदिरों में भी तो, यही पत्थर जुड़े, पत्थर की नाव में देखो पत्तर पतवारी ।

राम से बड़ा राम का नाम क्यों ? - Why Ram Name is More Powerful Than God Ram

Image
राम दरबार में एक बार हनुमान जी महाराज श्री राम की सेवा में इतने तन्मय हो गए कि, गुरू वशिष्ठ के आने का उनको ध्यान ही नहीं रहा। सबने उठ कर उनका अभिवादन किया पर, हनुमान जी नहीं कर पाए। गुरू वशिष्ठ जी ने इस अपमान से क्रोधित हो कर राम से हनुमान के लिए मृत्युदंड माँगा, वो भी राम के अमोघ बाण से जो अचूक शस्त्र था। महाराज श्री राम ने कहा स्वीकार है। दरबार में राम ने घोषणा की कि कल संध्याकाल में सरयु नदी के तट पर हनुमान जी को मैं स्वयं अपने अमोघ बाण से मृत्यु दण्ड दूँगा। हनुमानजी के घर पहुँचने पर माता अंजनी ने हनुमान से उदासी का कारण पूछा तो हनुमान ने अनजाने में हुई अपनी गलती और अन्य सारा घटनाक्रम बताया। माता अंजनी को मालूम था कि समस्त ब्रम्हाण्ड में हनुमान को कोई मार नहीं सकता और राम के अमोघ बाण से भी कोई बच भी नहीं सकता। माता अंजनी ने कहा- "मैंने भगवान शंकर से, 'राम नाम' मंत्र प्राप्त किया था और तुम्हें यह नाम घुटी में पिलाया है। उस 'राम नाम' मंत्र के होते कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता। चाहे वे स्वयं राम ही क्यों ना हों। 'राम नाम' की शक्ति के ...

Shri Ramayan Ji Ki Aarti in English

Image
।।  Shri Ramayan Ji Ki Aarti  ।। Aarti shri ramayan ji ki Kirti kalit lalit siya pi ki Gavat brahmadik muni narad Valmiki bigyan bisarad Suk sanakadi sesh aru sarad Barani pavanasut kirti niki - 1 Gavat bed puran ashtadas Chhao sastra sab granthan ko ras Muni jan dhan santan ko sarabas Sar ans sammat sabahi ki - 2 Gavat santat sambhu bhavani Aru ghatasambhav muni bigyani Byas aadi kabibarj bakhani Kagabhusundi garud ke hi ki - 3 Kalimal harani bishay ras phiki Subhag singar mukti jubati ki Dalan rog bhav moori ami ki taat maat sab bidhi tulasi ki - 4 Bolo Siyavar Ramachandra Ki Jai Pawansut Hanuman Ki Jai

श्री रामायण जी की आरती - Shri Ramayan Ji Ki Aarti in Hindi

Image
।। श्री रामायण जी की आरती ।। आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥ सुक सनकादि सेष अरु सारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥१॥ गावत बेद पुरान अष्टदस । छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥ मुनि जन धन संतन को सरबस । सार अंस संमत सबही की ॥२॥ गावत संतत संभु भवानी। अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥ ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी । कागभुसुंडि गरुड़ के ही की ॥३॥ कलिमल हरनि बिषय रस फीकी । सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥ दलन रोग भव मूरि अमी की । तात मात सब बिधि तुलसी की ॥४॥ बोलो सियावर रामचन्द्र की जय । पवनसुत हनुमान की जय ॥

श्री रामावतार - Shri Ramavtar

Image
भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौसल्या हितकारी । हर्षित महतारी, मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ।। लोचन अभिराम, तनुघनस्यामा, निज आयुध भुज चारी । भूषण बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिन्धु खरारी ।। कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी, केहि बिधि करौं अनंता । माया गुण ग्यानानीत अमाना, बेद पुरान भनन्ता ।। करुना सुखसागर सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता । सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भयउ प्रकट श्रीकंता ।। ब्रह्माण्ड निकाया निर्मित माया, रोम-रोम प्रति बेद कहै । मम उर सो बासी यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै ।। उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै । कहि कथा सुहाई मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ।। माता पुनि बोली सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा । कीजै सिसु लीला अति प्रियसीला, यह सुख परम अनूपा ।। सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना, होई बालक सुरभूपा । यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा ।। ।। जय श्री राम ।।

श्री राम स्तुति (आरती) - Shri Ram Aarti in Hindi

Image
श्री राम स्तुति - आरती श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भव भय दारुणम् । नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम् ।। कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील नीरद सुन्दरम् । पट पीत मानहूं तड़ित रुचि शुचि, नौमि जनक सुतावरम् ।। भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्यवंश-निकंदनम् । रघुनन्द आनन्दकंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम् ।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु, उदारू अंग विभूषणम् । आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खरधूषणम् ।। इति वदति तुलसीदास शंकर, शेष-मुनि-मन रंजनम् । मम ह्रदय-कंज निवास कुरु, कामादि खल दल-गंजनम् ।। मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु, सहज सुंदर सांवरो । करुणा निधान सुजान सीलू, सनेहु जानत रावरो ।। एहि भाँति गौरि असीस सुनि, सिय सहित हिय हरषीं अली । तुलसी भवानिहि पूजि पूनि पूनि, मुदित मन मन्दिर चली।। ।।सोरठा।। जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि । मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।   ।। सियावर रामचंद्र की जय ।।