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हम रामकथा क्यों सुने ? Why do we listen Ram Katha?

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रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥ रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ भावार्थ :- श्री रामचन्द्रजी की कथा हाथ की सुंदर ताली है, जो संदेह रूपी पक्षियों को उड़ा देती है। फिर रामकथा कलियुग रूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी है। हे गिरिराजकुमारी! तुम इसे आदरपूर्वक सुनो॥ राम कथा और भगवान कथा की महिमा - बंधुओं, भगवान श्री राम ने कुछ ही जीवों का उद्धार किया होगा। हजारों, लाखों का। लेकिन भगवान श्री राम की कथा  तो आज भी करोड़ों लोगो का उद्धार कर रही है। राम कथा सुनो , कृष्ण कथा सुनो, हरी कथा सुनो, शिव कथा सुनो आपके जो भी इष्ट देव है उनकी कथा सुनों, क्योंकि इस धरती पर अगर वास्तव में कुछ सुनने के लिए है तो वो है सिर्फ भगवान की कथा। और जिसने सुनी हैं तो दोबारा सुनो। राम चरित्र को जीवन में धारण करने की कोशिश करो। यदि कोई कहे की हमने रामायण पढ़ ली हैं। देखिये तुलसीदास जी कितना सुंदर कह रहे हैं- राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं॥ जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहिं निरंतर तेऊ॥ भावार्थ :- श्री रामजी के चरित्र सुनते-सुनते जो तृप्त हो ...

माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके - 35 Simple ways to respect parents

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1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखें।     Keep your phone away in their presence. 2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दें।     Focus on what they are saying. 3. उनकी राय स्वीकारें।     Accept their opinion. 4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों।     Join their conversation. 5. उन्हें सम्मान के साथ देखें।     See them with respect. 6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें।     Always admire them. 7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ।     Tell them good news. 8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें।     Avoid sharing bad news with them. 9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें।     Speak well with their friends and loved ones. 10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें।       Remember the good work done by them always. 11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो।...

नदी और दोस्त - River and Friend (A Motivational Story)

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एक गांव में दो दोस्त रहते थे। एक बार उन्होंने शहर जाकर कुछ काम करने का फैसला किया और शहर के लिए निकल पड़े। गांव के अंत में एक जमी हुई नदी थी। शहर जाने के लिए उन्हें वह नदी पार करनी ही थी। वहां कोई पुल भी नहीं था।  ऐसे में एक दोस्त ने कहा कि नदी पार करना खतरनाक है, इसलिए बेहतर है कि गांव में ही रहें। हालांकि, दूसरा दोस्त कुछ और ही सोच रहा था। उसने मन में निश्चय कर लिया था कि वह किसी भी कीमत पर शहर जाकर ही रहेगा।  अपने इस दृढ़-निश्चय के साथ वह जमी हुई नदी पर आगे बढ़ने लगा। उसका दोस्त किनारे पर खड़ा होकर उसे ऐसा करने से रोक रहा था। वह चिल्ला रहा था कि तुम गिर जाओगे। कुछ कदम चलने के बाद वह लड़का जमी हुई नदी पर फिसल गया।  किनारे खड़े दोस्त ने उसे लौटने के लिए कहा लेकिन वह फिर से खड़ा हुआ और आगे बढ़ने लगा। सावधानी से आगे बढ़ते हुए उसने आखिरकार नदी पार कर ली और शहर की ओर बढ़ गया। वहीं, उसके दोस्त ने नदी पार करने की कोशिश ही नहीं की और वहीं राह गया। मंत्र: अगर आप कुछ ठान लें तो अवश्य ही उसे हासिल कर सकते हैं।

एक बेटा और वृद्ध पिता - A Son and Old Father (A Moral Story)

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एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे खाना खा रहे दूसरे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे, लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया। उनके कपड़े साफ़ किये, उनका चेहरा साफ़ किया, उनके बालों में कंघी की,चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया। सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे। बेटे ने बिल का भुगतान किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा। तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा "क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?" बेटे ने जवाब दिया "नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर नहीं जा रहा।" वृद्ध ने कहा "बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो, प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद (आशा)।" आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसंद नहीँ करते और कहते हैं क्या करोगे आप? आप से चला तो जाता नह...

धर्म और मुक्ति - Religion and Liberation

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शिप्रा नदी के पास बसे एक गांव से एक पंडित रोज नदी को पार कर उज्जैन शहर मे रहने वाले एक धनी सेठ को कथा सुनाने जाता था। पंडित रोज सेठ को कथा सुनाता और बदले में सेठ उसे धन दान देता। ऐसे ही एक दिन जब वह पण्डित सेठ को कथा सुनाने के लिये नदी को पार करके जा रहा था तो उसे एक आवाज सुनाई दी - "कभी हमें भी ज्ञान दे दिया करो।" पण्डित ने इधर-उधर देखा मगर उसे वहां कोई दिखाई नही दिया। उसे फिर अपने पास से ही एक आवाज सुनाई दी - "पण्डित जी मैं यहाँ हूँ।" पण्डित ने देखा कि वह एक घड़ियाल था। पण्डित जी हैरान भी थे घड़ियाल को इंसान की आवाज में बोलते सुनकर और घबराये भी थे। घड़ियाल ने कहा - "पण्डित जी आप डरिये नही आप मुझे कथा सुनाकर ज्ञान प्रदान करे और यह सब मैं मुफ्त में भी नही मांग रहा हूँ। आपकी कथा के बदले में रोज आपको एक अशर्फी मैं दिया करूंगा।" पण्डित को बात जची। पण्डित को तो धन की चाहत थी फिर चाहे वो उसे नदी के उस पार सेठ को कथा सुनाने से मिले या नदी के इस किनारे घड़ियाल को कथा सुनाकर मिले। रोज वह पण्डित घड़ियाल को कथा सुनाता और रोज घड़ियाल पण्डित को एक अशर्फी बदल...

क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा ? - Why do Worship Lord Ganesha ?

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क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा? भगवान गणेश को सभी अच्‍छे गुणों और सफलताओं का देवता माना जाता है इसीलिए लोग हर अच्‍छे काम को करने से पहले गणेश जी की पूजा करना शुभ मानते हैं। भगवान गणेश के जन्‍मदिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग, आध्‍यात्मिक शक्ति के लिए, कार्य सिद्धि के लिए और लाभ प्राप्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन धूमधाम से करते है। भगवान गणेश को सभी दुखों का हर्ता, संकट दूर करने वाला,  सदबुद्धि देने वाला माना जाता है। उनकी पूजा करने से आध्‍यात्मिक समृद्धि मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती है।  भगवान गणेश के हर रूप की पूजा, विशिष्‍ट व्‍याख्‍या प्रदान करती है। भगवान गणेश की पूजा करने वाले लोगों के कई मत होते है। लोगों द्वारा भगवान गणेश की पूजा सर्वप्रथम करने और उसके पीछे के कारणों को जानना बेहद रोचक होता है। आज हम आपको कुछ महत्‍वपूर्ण और रोचक तथ्‍य बता रहे हैं कि किसी भी समारोह, उत्‍सव या अनुष्‍ठान में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्‍यों की जाती है? बाधाओं को दूर करते हैं हिंदू धर्म के सभी अनुयायियों का मानना है कि किसी भी नए का...

आम का पेड़ - The Tree of Mango (A Heart Touching Story)

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एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। पेड के उपर चढ़ता, आम खाता, खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया। बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया। आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता। एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा- "तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।" बच्चे ने आम के पेड से कहा- "अब मेरी खेलने की उम्र नही है। मुझे पढना है, लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।" पेड ने कहा- "तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे। इससे जो पैसे मिले उससे अपनी फीस भर देना।" उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया। उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया। आम का पेड उसकी राह देखता रहता। एक दिन वो फिर आया और कहने लगा- "अब मुझे नौकरी मिल गई है, मेरी शादी भी हो चुकी है, मुझे मेरा अपना ...

वृंदावन की एक गोपी - A Gopi of Vrindavan (प्रभु नाम में पूर्ण विश्वास एंव श्रद्धा)

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वृंदावन की एक गोपी रोज दूध दही बेचने मथुरा जाती थी। एक दिन ब्रज में एक संत आये, गोपी भी कथा सुनने गई। संत कथा में कह रहे थे- "भगवान के नाम की बड़ी महिमा है, उनके नाम से बड़े बड़े संकट भी टल जाते है। प्रभु का नाम तो भव सागर से तारने वाला है। यदि भव सागर से पार होना है तो भगवान का नाम कभी मत छोडना।" कथा समाप्त हुई गोपी अगले दिन फिर दूध दही बेचने चली। बीच में यमुना जी थी। गोपी को संत की बात याद आई, संत ने कहा था भगवान का नाम तो भवसागर से पार लगाने वाला है। गोपी ने सोचा, जिस भगवान का नाम भव सागर से पार लगा सकता है तो क्या उन्ही भगवान का नाम मुझे इस साधारण सी नदी से पार नहीं लगा सकता ? ऐसा सोचकर गोपी ने मन में भगवान के नाम का आश्रय लिया और भोली भाली गोपी यमुना जी की ओर आगे बढ़ गई। अब जैसे ही यमुना जी में पैर रखा तो लगा मानो जमीन पर चल रही है और ऐसे ही सारी नदी पार कर गई। पार पहुँचकर बड़ी प्रसन्न हुई और मन में सोचने लगी कि संत ने तो ये बड़ा अच्छा तरीका बताया पार जाने का। रोज-रोज नाविक को भी पैसे नहीं देने पड़ेगे। एक दिन गोपी ने सोचा कि संत ने मेरा इतना भला किया म...

चटोरे मदनमोहन - Chatore Madan Mohan (A Religious Story)

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सनातन गोस्वामी जी मथुरा में एक चौबे के घर मधुकरी के लिए जाया करते थे। उस चौबे की स्त्री परमभक्त और मदन मोहन जी की उपासिका थी, उसके घर बाल भाव से मदन मोहन भगवान विराजते थे। असल में सनातन जी उन्ही मदन मोहन जी के दर्शन हेतु प्रतिदिन मधुकरी के बहाने जाया करते थे। मदन मोहन जी तो ग्वार ग्वाले ही ठहरे ये आचार विचार क्या जाने, उस चौबे के लड़के के साथ ही एक पात्र में भोजन करते थे। ये देख सनातन जी को बड़ा आश्चर्य हुआ, ये मदनमोहन तो बड़े वचित्र है। एक दिन इन्होने आग्रह करके मदन मोहन जी का उच्छिष्ठ (झूठा) अन्न मधुकरी में माँगा। चौबे की स्त्री ने भी स्वीकार करके दे दिया, बस फिर क्या था। इन्हे उस माखन चोर की लपलपाती जीभ से लगे हुए अन्न का चश्का लग गया, ये नित्य उसी अन्न को लेने जाने लगे। एक दिन मदन मोहन ने इन्हे स्वप्न में दर्शन देकर कहा, बाबा तुम रोज इतनी दूर से आते हो, और इस मथुरा शहर में भी हमे ऊब सी मालूम होवे है। तुम उस चौबे से हमको मांग के ले आओ हमको भी तुम्हारे साथ जंगल में रहनो है।  ठीक उसी रात को चौबे को भी यही स्वप्न हुआ की हमको आप सनातन बाबा को दान कर दो...

भगवान श्रीकृष्ण के बारे में दिलचस्प जानकारी - Interesting Information about Lord Shri Krishna

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भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है। राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है। महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है। उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है। बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है। दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जाते है। गुजरात में द्वारिकाधीश के नाम से जाने जाते है। असम, त्रिपुरा, नेपाल इत्यादि पूर्वोत्तर क्षेत्रो में कृष्ण नाम से ही पूजा होती है। मलेशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस इत्यादि देशो में कृष्ण नाम ही विख्यात है। गोविन्द या गोपाल में "गो" शब्द का अर्थ गाय एवं इन्द्रियों, दोनों से है। गो एक संस्कृत शब्द है और ऋग्वेद में गो का अर्थ होता है मनुष्य की इंद्रिया, जो इन्द्रियों का विजेता हो जिसके वश में इंद्रिया हो वही गोविंद है गोपाल है। श्री कृष्ण के पिता का नाम वसुदेव था इसलिए इन्हें आजीवन "वासुदेव" के नाम से जाना गया। श्री कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था। श्री क...

हिन्दू क्यों करते है गाय की पूजा - Why do Hindus Worship the Cow?

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गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी Some Interesting Information About Cow गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है। वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं। गौ माता में तैंतीस कोटी देवी देवताओं का वास है। जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं। गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे। गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है। जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है। गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है। जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते। गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है। गौ माता के मुत्र में गंगाजी का वास होता है। गौ माता के गोबर से बने उपलों का रोजाना घर दूकान मंदिर परिसरों पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता है सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। गौ माता के एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है। गाय इस धरती पर साक्षात देवता है। गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है। मनोकामना पूर्ण करने वाली है। गौ माता के दुध मे ...

सातवां घड़ा - Seventh Pitcher (A Moral Story)

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एक गाँव में एक नाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। नाई ईमानदार था, अपनी कमाई से संतुष्ट था। उसे किसी तरह का लालच नहीं था। नाई की पत्नी भी अपनी पति की कमाई हुई आय से बड़ी कुशलता से अपनी गृहस्थी चलाती थी। कुल मिलाकर उनकी जिंदगी बड़े आराम से हंसी-खुशी से गुजर रही थी। नाई अपने काम में बहुत निपुण था। एक दिन वहाँ के राजा ने नाई को अपने पास बुलवाया और रोज उसे महल में आकर हजामत बनाने को कहा। नाई ने भी बड़ी प्रसन्नता से राजा का प्रस्ताव मान लिया। नाई को रोज राजा की हजामत बनाने के लिए एक स्वर्ण मुद्रा मिलती थी।  इतना सारा पैसा पाकर नाई की पत्नी भी बड़ी खुश हुई। अब उसकी जिन्दगी बड़े आराम से कटने लगी। घर पर किसी चीज की कमी नहीं रही और हर महीने अच्छी रकम की बचत भी होने लगी। नाई, उसकी पत्नी और बच्चे सभी खुश रहने लगे। एक दिन शाम को जब नाई अपना काम निपटा कर महल से अपने घर वापस जा रहा था, तो रास्ते में उसे एक आवाज सुनाई दी। आवाज एक यक्ष की थी। यक्ष ने नाई से कहा, ‘‘मैंने तुम्हारी ईमानदारी के बड़े चर्चे सुने हैं, मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत खुश हूँ और तुम्हें सोने क...

संत और कसाई का तोता - Parrot of the Sage and Butcher (संगति का असर)

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एक राजा ने एक तोता पाल रखा था। एक दिन वह तोता मर गया। राजा ने मंत्री को कहा- "मंत्रीवर, हमारा तोते का पिंजरा सूना हो गया है। इसमें पालने के लिए एक तोता लाओ। अब, तोते सदैव तो मिलते नहीं। लेकिन राजा पीछे पड़ गये तो मंत्री एक संत के पास गये और कहा- "भगवन्, राजा साहब एक तोता लाने की जिद कर रहे हैं। आप अपना तोता दे दें तो बड़ी कृपा होगी।" संत ने कहा- "ठीक है, ले जाओ।" राजा ने सोने के पिंजरे में बड़े स्नेह से तोते की सुख-सुविधा का प्रबन्ध किया। ब्रह्म मुहूर्त होते ही तोता बोलने लगता- "ओम् तत्सत्... ओम् तत्सत्... उठो राजा! उठो महारानी! दुर्लभ मानव-तन मिला है। यह सोने के लिए नहीं, भजन करने के लिए मिला है।" चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर । तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर ।। कभी रामायण की चौपाई, तो कभी गीता के श्लोक तोते के मुँह से निकलते। पूरा राजपरिवार बड़े सवेरे उठकर उसकी बातें सुना करता था। राजा कहते थे कि सुग्गा क्या मिला, एक संत मिल गये। हर जीव की एक निश्चित आयु होती है। एक दिन वह सुग्गा मर गया। राजा, रानी, राजपरिवार और पूरे राष्ट्र ने हफ़...

श्री माधवेन्द्र पुरीपाद जी के जीवन की एक सत्य घटना - A Real Incident of Shri Madhvendra Puripad Ji

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एक बार श्री माधवेन्द्र पुरीपाद जी अपने श्री गोवर्धनधारी गोपाल के लिए चन्दन लेने पूर्व देश की ओर गए। चलते - चलते वह ओड़िसा के रेमुणा नामक स्थान पर पहुंचे। वहां पर श्री गोपीनाथ जी के दर्शन कर वह बहुत प्रसन्न हुए। कुछ ही समय में ''अमृतकेलि'' नामक खीर का भोग श्री गोपीनाथ जी को लगाया गया। तब उनके मन में विचार आया कि बिना मांगे ही इस खीर का प्रसाद मिल जाता तो मैं उसका आस्वादन करके, ठीक उसी प्रकार का भोग अपने गोपाल जी को लगाता किन्तु साथ ही साथ अपने आपको धिक्कार दिया कि मेरी खीर खाने की इच्छा हुई। ठाकुर जी की आरती दर्शन करके और उन्हें प्रणाम करके वह मंदिर से चले गये व एक निर्जन स्थान पर बैठ कर हरिनाम का जाप करने लगे। इधर मंदिर के पुजारी ठाकुर गोपीनाथ जी की सेवा कार्य समाप्त कर सो गए। उसे स्वप्न में ठाकुर जी ने दर्शन दिये व कहा- ''पुजारी उठो ! मंदिर के दरवाज़े खोलो। मैंने एक संन्यासी के लिये खीर रखी हुई है जो कि मेरे आंचल के कपड़े से ढकी हुई है। मेरी माया के कारण तुम उसे नहीं जान पाये। माधवेन्द्र पुरी नाम के संन्यासी कुछ ही दूर एक निर्जन स्थान पर...

कृष्ण और सुदामा का अटूट प्रेम - The Friend Love of Krishna And Sudama

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कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था। प्रेम भी इतना कि कृष्ण, सुदामा को रात दिन अपने साथ ही रखते थे। कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते। एक दिन दोनों वनसंचार के लिए गए और रास्ता भटक गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक ही फल लगा था। कृष्ण ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा। कृष्ण ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा सुदामा को दिया। सुदामा ने टुकड़ा खाया और बोला, "बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक टुकड़ा और दे दो। दूसरा टुकड़ा भी सुदामा को मिल गया। सुदामा ने एक टुकड़ा और कृष्ण से मांग लिया। इसी तरह सुदामा ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए। जब सुदामा ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो कृष्ण ने कहा, "यह सीमा से बाहर है, मित्र। आखिर मैं भी तो भूखा हूं। मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं करते।" और कृष्ण ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया। मुंह में रखते ही कृष्ण ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था। कृष्ण बोले, "तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?"  उस सुदामा का उत्तर था- "जिन हाथों से बहुत म...

सुदामा जी को गरीबी क्यों मिली? - Why Did Sudama Get Poverty?

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अगर अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो सुदामा जी बहुत धनवान थे। जितना धन उनके पास था, उतना धन किसी के पास नहीं था, पर भौतिक दृष्टि से वह बहुत निर्धन थे। आखिर क्यों, सुदामा जी को गरीबी मिली ? एक ब्राह्मणी थी जो बहुत गरीब निर्धन थी। भिक्षा माँग कर जीवन यापन करती थी। एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिक्षा नहीं मिली तो वह प्रतिदिन पानी पीकर भगवान का नाम लेकर सो जाती थी। छठवें दिन उसे भिक्षा में दो मुट्ठी चना मिले। कुटिया तक पहुँचते-पहुँचते रात हो गयी। ब्राह्मणी ने सोचा, अब ये चने रात में नही खाऊँगी। प्रात:काल वासुदेव को भोग लगाऊंगी तब खाऊँगी। यह सोचकर ब्राह्मणी ने चनों को कपड़े में बाँधकर रख दिया और वासुदेव का नाम जपते-जपते सो गयी। समय का खेल देखिए कहते हैं "पुरुष बली नहीं होत है समय होत बलवान"। ब्राह्मणी के सोने के बाद कुछ चोर चोरी करने के लिए उसकी कुटिया में आ गये। इधर-उधर ढूँढने पर चोरों को वह चनों की बँधी पोटली मिल गयी चोरों ने समझा इसमें सोने के सिक्के हैं। इतने में ब्राह्मणी जाग गयी और शोर मचाने लगी। गाँव के सारे लोग चोरों को पकड़ने के लिए दौड़े। पकड़े जाने ...

भगवान श्री जगन्नाथ जी को भेंट - Donation to Lord Shri Jagannath Ji

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बहुत पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था जो भी जरुरी काम हो वह सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था। वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था। एक दिन उस भक्त ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा- "भाई मैं तो हूँ संसारी आदमी, हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूँ जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता। तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना।" भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया। कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा। मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत, भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं। सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है। जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल गूंज रहा है। संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था। भक्त भी वहीं रुक कर ह...

मुनि तरूण सागर जी के सफलता के 20 मंत्र - 20 Mantras of Success of Muni Tarun Sagar Ji

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1. खुद की कमाई से कम खर्च हो, ऐसी जिन्दगी बनाओ। 2. दिन मेँ कम से कम 3 लोगो की प्रशंसा करो।   3. खुद की भूल स्वीकारने मेँ कभी भी संकोच मत करो। 4. किसी के सपनो पर मत हँसो। 5. आपके पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी - कभी आगे जाने का मौका दो। 6. रोज हो सके तो सुरज को उगता हुए देखे। 7. खूब जरुरी हो तभी कोई चीज उधार लो। 8. किसी के पास से कुछ जानना हो तो विवेक से दो बार पुछो। 9. कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दो। 10. खुद पर पुरा भरोसा रखो। 11. प्रार्थना करना कभी मत भुलो, प्रार्थना मेँ अपार शक्ति होती है। 12. अपने काम से मतलब रखो। 13. समय सबसे ज्यादा कीमती है, इसको फ़ालतू कामो मेँ खर्च मत करो। 14. जो आपके पास है, उसी मेँ खुश रहना सीखो। 15. कभी भी किसी की बुराई मत करो। क्योंकि बुराई, नाव मेँ छेद समान है, बुराई छोटी हो तो भी बडी नाव को डुबो ही देती है। 16. हमेशा सकारात्मक सोच रखो। 17. हर व्यक्ति एक हुनर लेकर पैदा होता है बस उस हुनर को दुनिया के सामने लाओ। 18. कोई काम छोटा नही होता हर काम बडा होता है, जैसे कि सोचो जो काम आप कर रहे हो अगर वह ...

भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी - Lord Vishnu And Maa Laxmi (प्रभु की कृपा)

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एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बैठे बैठे बोर हो गये तो उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया। वैसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये और वह अपनी यात्रा की तैयारी में लग गये। स्वामी को तैयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा- "आज सुबह सुबह कहा जाने की तैयारी हो रही है?" विष्णु जी ने कहा- "हे लक्ष्मी, मैं धरती लोक पर घुमने जा रहा हूँ।"  कुछ सोच कर लक्ष्मी मां ने कहा- "हे देव, क्या मैं भी आप के साथ चल सकती हूँ?" भगवान विष्णु ने दो पल सोचा फ़िर कहा- "एक शर्त पर, तुम मेरे साथ चल सकती हो। तुम धरती पर पहुंच कर उत्तर दिशा की ओर बिलकुल मत देखना।" इस के साथ ही माता लक्ष्मी ने हाँ कह कर अपनी बात मनवाली।  सुबह सुबह मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु धरती पर पहुच गये। अभी सुर्य देवता निकल रहे थे, रात बरसात हो कर हटी थी। चारो ओर हरियाली ही हरियाली थी। उस समय चारो ओर बहुत शान्ति थी और धरती बहुत ही सुन्दर दिख रही थी। मां लक्ष्मी मन्त्र मुग्ध हो कर धरती को देख रही थी और भुल गई कि पति को क्या वचन दे कर आई है? चारों ओर देखती हुयी कब उत्तर दिशा की ...

विष्णु भक्त बालक महिदास की कहानी - Story of Lord Vishnu Devotee Child Mahidas (भक्तों के भगवान)

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भगवान अपने भक्त का हमेशा ध्यान रखते है। अगर भक्त सभी मुश्किलों को झेलते हुए अपने ईश्वर पर विश्वास करता है तो भगवान भी ऐसे भक्त के लिए कुछ भी कर देते हैं। हमारे इतिहास में वैसे इस तरह की कई कहानियां हैं लेकिन संत महिदास जी की कथा को बहुत ही कम लोग जानते हैं। एक बच्चा जो विष्णु भगवान को बहुत मानता था और इनकी आराधना करता था। उसके पिता उसे निकम्मा समझते थे और समाज भी इज्जत नहीं देता था। एक बार बालक परेशान हुआ तो कहते हैं कि भगवान विष्णु धरती फाड़कर उसमें से प्रकट हुए थे। तो आइये आज इसी बालक महिदास की कहानी पढ़ते हैं। पेश है आज का विशेष- भक्तों के भगवान। हारीत ऋषि के वंश में माणडूकि नाम के विधान थे। कहते हैं कि इनकी कई पत्नियाँ थीं। इसीलिए शायद शास्त्रों में यह ऋषि काफी विवादों से घिरे हुए रहे हैं। अनेक पत्नियों में से एक पत्नी का नाम इतरा था। इन्हीं से जन्म लेने वाले पुत्र का नाम महिदास था। लेकिन यहाँ पर इस ऋषि के नाम पर कुछ विवाद हैं। पहला विवाद यह है कि हारीत ऋषि खुद तो हारित थे तो इनका बच्चा कैसे ‘मही’-‘दास’ बोला जाता है। क्योकि दास एक छोटी जाति का सूचक है। तो क...