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श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् - Shri Vindhyeshwary Strotram in Hindi

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।। श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् ।। निशुम्भ-शुम्भ गर्जनीं, प्रचण्ड मुण्ड खन्डिनीं । वने रणे प्रकशिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणीं, धराविघातहारिणीं । गृहे - गृहे निवासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ दरिद्र्  दुःख हारिणीं, सदा विभूतिकारिणीं । वियोगशोक हारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ लसत्सुलोल लोचनं, लता सदम्बरप्रदां । कपाल - शूल धारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ कराब्जदानदाधरां, शिवाशिवां प्रदायिनीं । वरा - वराननां शुभां, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ कपीन्द्र - जामिनीप्रदां, त्रिधास्वरूपधारिणीं । जले - थले निवासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ विशिष्ट - सृष्टिकारिणीं, विशालरूप धारिणीं । महोदरे - विशालिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ पुरन्दरादिसेवितां, मुरादिवंशखंडिनीं । विशुद्ध - बुद्धिकारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ ।। इति श्री विन्ध्येश्वरीस्तोत्रम् समाप्त ।।

श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा - Shri Vindhyeshwari Chalisa in Hindi

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। ।  श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा  । । ।। दोहा ।। नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब । सन्तजनों के काज में, करती नहीं विलम्ब  ॥ जय जय जय विन्ध्याचल रानी ।  आदि शक्ति जग विदित भवानी  ॥ सिंह वाहिनी जय जगमाता ।  जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता  ॥ कष्ट निवारिनि जय जग देवी ।  जय जय संत असुर सुरसेवी   ॥ महिमा अमित अपार तुम्हारी ।  सेष सहस मुख बरनत हारी ॥ दीनन के दु:ख हरत भवानी ।  नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी ॥ सब कर मनसा पुरवत माता ।  महिमा अमित जगत विख्याता॥ जो जन ध्यान तुम्हारो लावे ।  सो तुरतहिं वांछित फल पावे ॥ तू ही वैस्नवी तू ही रुद्रानी ।  तू ही शारदा अरु ब्रह्मानी ॥ रमा राधिका स्यामा काली ।  तू ही मात संतन प्रतिपाली ॥ उमा माधवी चंडी ज्वाला ।  बेगि मोहि पर होहु दयाला ॥ तुम ही हिंगलाज महरानी ।  तुम ही शीतला अरु बिज्ञानी ॥ तुम्ही लक्ष्मी जग सुख दाता ।  दुर्गा दुर्ग बिनासिनि माता ॥ तुम ही जाह्नवी...