Posts

Showing posts with the label Satyanarayan

भजन: श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी - Shree Krishan Govind Hare Murari

Image
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी । हे नाथ नारायण वासुदेवा ।। संतो के रक्षक भगतो के प्यारे । शत कोटि तुमको नमन हमारे ।। श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी । हे नाथ नारायण वासुदेवा ।। संतो के रक्षक भगतो के प्यारे । शत कोटि तुमको नमन हमारे ।। श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी । हे नाथ नारायण वासुदेवा ।। संतो के रक्षक भगतो के प्यारे । शत कोटि तुमको नमन हमारे ।।

भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी - Lord Vishnu And Maa Laxmi (प्रभु की कृपा)

Image
एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बैठे बैठे बोर हो गये तो उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया। वैसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये और वह अपनी यात्रा की तैयारी में लग गये। स्वामी को तैयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा- "आज सुबह सुबह कहा जाने की तैयारी हो रही है?" विष्णु जी ने कहा- "हे लक्ष्मी, मैं धरती लोक पर घुमने जा रहा हूँ।"  कुछ सोच कर लक्ष्मी मां ने कहा- "हे देव, क्या मैं भी आप के साथ चल सकती हूँ?" भगवान विष्णु ने दो पल सोचा फ़िर कहा- "एक शर्त पर, तुम मेरे साथ चल सकती हो। तुम धरती पर पहुंच कर उत्तर दिशा की ओर बिलकुल मत देखना।" इस के साथ ही माता लक्ष्मी ने हाँ कह कर अपनी बात मनवाली।  सुबह सुबह मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु धरती पर पहुच गये। अभी सुर्य देवता निकल रहे थे, रात बरसात हो कर हटी थी। चारो ओर हरियाली ही हरियाली थी। उस समय चारो ओर बहुत शान्ति थी और धरती बहुत ही सुन्दर दिख रही थी। मां लक्ष्मी मन्त्र मुग्ध हो कर धरती को देख रही थी और भुल गई कि पति को क्या वचन दे कर आई है? चारों ओर देखती हुयी कब उत्तर दिशा की ...

भगवान नारायण और शिव शंकर - Lord Vishnu And Shiv Shankar (दो शरीर एक आत्मा)

Image
एक बार भगवान नारायण वैकुण्ठ लोक में सोये हुए थे। उन्होंने स्वप्न में देखा कि करोड़ों चन्द्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरू-धारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेन्द्र-वन्दित, सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान शिव प्रेम और आनन्दातिरेक से उन्मत्त होकर उनके सामने नृत्य कर रहे हैं। उन्हें देखकर भगवान विष्णु हर्ष से गद्गद् हो उठे और अचानक उठकर बैठ गये, कुछ देर तक ध्यानस्थ बैठे रहे।  उन्हें इस प्रकार बैठे देखकर श्रीलक्ष्मी जी पूछने लगीं, "भगवन! आपके इस प्रकार अचानक निद्रा से उठकर बैठने का क्या कारण है?" भगवान ने कुछ देर तक उनके इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया और आनंद में मग्न हुए चुपचाप बैठे रहे, कुछ देर बाद हर्षित होते हुए बोले- "देवी, मैंने अभी स्वप्न में भगवान श्री महेश्वर का दर्शन किया है। उनकी छवि ऐसी अपूर्व आनंदमय एवं मनोहर थी कि देखते ही बनती थी। मालूम होता है, शंकर ने मुझे स्मरण किया है। अहोभाग्य, चलो, कैलाश में चलकर हम लोग महादेव के दर्शन करें।" ऐसा विचार कर दोनों कैलाश की ओर चल दिये। भगवान शिव के दर्शन के लिए कैलाश मार्ग पर आधी दूर गये होंगे कि देखते है...

भगवान विष्णु भक्त नारद मुनि - Lord Vishnu Devotee Narad Muni

Image
एक बार नारद मुनि पृथ्वी का भ्रमण कर रहे थे। तब उन्हें उनके एक खास भक्त जो नगर का सेठ था ने याद किया। अच्छी सत्कार के बाद सेठ ने नारद जी से प्रार्थना की- "आप ऐसा कोई आर्शीवाद दें कि कम से कम एक बच्चा हो जाए।" नारद ने कहा कि तुम लोग चिंता न करो, मैं अभी प्रभु नारायण से मिलने जा रहा हूं। उन तक तुम्हारी प्रार्थना पहुंचा दूंगा और वे अवश्य कुछ करेंगे। नारद विष्णु धाम गए और सेठ की व्यथा बताई। भगवन्‌ बोले कि उसके भाग्य में संतान सुख नहीं है इसलिए कुछ नहीं हो सकता।  उसके कुछ समय बाद नारद ने एक दीये में तेल ऊपर तक भरा और अपनी हथेली पर सजाया और पूरे विश्व की यात्रा की। अपनी निर्विघ्न यात्रा का समापन उन्होंने विष्णु धाम आकर ही संपन्न किया। इस पूरी प्रक्रिया में नारद को बड़ा घमंड हो गया कि उनसे ज्यादा ध्यानी और विष्णु भक्त कोई ओर नहीं। अपने इसी घमंड में नारद पुनः पृथ्वी लोक पर आए और उसी सेठ के घर पहुंचे। इस दौरान सेठ के घर में छोटे-छोटे चार बच्चे घूम रहे थे।  नारद ने जानना चाहा कि ये संतान किसकी हैं तो सेठ बोले- "आपकी हैं प्रभु।" नारद इस बात से खुश न...

श्री सत्यनारायण जी की आरती - Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi

Image
।। श्री सत्यनारायण जी की आरती ।। जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ जय लक्ष्मी... रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे । नारद करत निरंजन, घण्टा ध्वनि बाजे ॥ जय लक्ष्मी... प्रकट भये कलिकारण, द्विज को दरस दियो । बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥ जय लक्ष्मी... दुर्बल भील कठियारो, जिन पर कृपा करी । चन्द्रचूढ़ एक राजा, तिनकी विपत हरी ॥ जय लक्ष्मी... वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीनी । सो फल भोग्यो प्रभु जी, फिर स्तुति किन्ही ॥ जय लक्ष्मी... भाव भक्ति के कारण, छिन - छिन रूप धरयो । श्रद्धा धारण कीनी, तिनके काज सरयो ॥ जय लक्ष्मी... ग्वाल बाल संग राजा, वन में भक्ति करी । मनवांछित फल दिन्हो, दीनदयाल हरी ॥ जय लक्ष्मी... चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा । धूप दीप तुलसी से, राजी सत्य देवा ॥ जय लक्ष्मी... श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥ जय लक्ष्मी...