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नमक का स्वाद - Taste of Salt (Shri Krishna and Satyabhama)

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एक बार सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा - मैं आप को कैसी लगती हूँ ? श्रीकृष्ण ने कहा तुम मुझे नमक जैसी लगती हो। सत्यभामा इस तुलना को सुन कर क्रुद्ध हो गयी, तुलना भी की तो किस से, आपको इस संपूर्ण विश्व में मेरी तुलना करने के लिए और कोई पदार्थ नहीं मिला। श्रीकृष्ण ने उस वक़्त तो किसी तरह सत्यभामा को मना लिया और उनका गुस्सा शांत कर दिया। कुछ दिन पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने महल में एक भोज का आयोजन किया। छप्पन भोग की व्यवस्था हुई। श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम आठों पटरानियों को, जिनमें पाकशास्त्र में निपुण सत्यभामा भी थी, से भोजन प्रारम्भ करने का आग्रह किया। सत्यभामा ने पहला कौर मुँह में डाला मगर यह क्या.. सब्जी में नमक ही नहीं था। सत्यभामा ने उस कौर को मुँह से निकाल दिया। फिर दूसरा कौर मावा-मिश्री का मुँह में डाला और फिर उसे चबाते-चबाते बुरा सा मुँह बनाया और फिर पानी की सहायता से किसी तरह मुँह से उतारा। अब तीसरा कौर फिर कचौरी का मुँह में डाला और फिर.. आक्..थू ! तब तक सत्यभामा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था। जोर से चीखीं.. किसने बनाई है यह रसोइ ? सत्यभामा की आवाज सुन कर श्रीकृष्ण दौड़ते ह...

नारी का सम्मान - Respect of Women (Poem)

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भूल से मत कीजिये, नारी का अपमान । नारी जीवन दायिनी, नारी है वरदान ।। माँ बनकर देती जनम, पत्नी बन संतान । जीवन भर छाया करे, नारी वृक्ष समान ।। नारी भारत वर्ष की, रखे अलग पहचान । ले आई यमराज से, वापस पति के प्रान ।। नारी कोमल निर्मला, होती फूल समान । वक्त पड़े तो थाम ले, बरछी तीर कमान ।। नारी के अंतर बसे, सहनशीलता आन । ये है मूरत त्याग की, नित्य करे बलिदान ।। नारी को मत मानिये, दुर्बल अबला-जान । दुर्गा काली कालिका, नारी है तूफ़ान ।। युगों-युगों से ये जगत, ठहरा पुरुष प्रधान । कदम-कदम पर रोकता, नारी का उत्थान ।। जितना गाओ कम लगे, नारी का गुणगान । जी चाहे कण-कण करे, नारी का सम्मान ।।

भजन: आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं - Aarti Jagjanni Main Teri Gaaun

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आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं । तुम बिन कौन सुने वरदाती, किस को जा कर विनय सुनाऊं ॥ असुरों ने देवों को सताया, तुमने रूप धरा महामाया । उसी रूप का मैं दर्शन चाहूँ ॥ रक्तबीज मधुकैटब मारे, अपने भक्तों में काज सँवारे । मैं भी तेरा दास कहाऊं ॥ आरती तेरी करू वरदाती, हृदय का दीपक नैयनो की भांति । निसदिन प्रेम की ज्योति जगाऊं ॥ ध्यानु भक्त तुमरा यश गाया, जिस ध्याया, माता फल पाया । मैं भी दर तेरे सीस झुकाऊं ॥ आरती तेरी जो कोई गावे, चमन सभी सुख सम्पति पावे । मैया चरण कमल राज चाहूँ ॥

भजन: मुझे माँ ने बुलाया है - Mujhe Maa Ne Bulaya Hai

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मुझे माँ ने बुलाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है । जगजननी माँ शेरों वाली, मेहरो वाली माँ मेरी । द्वार दया का खोल के बैठी, जग कल्याणी माँ मेरी । तन मन हर्षाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥ ऊँचे पर्वत पर मैया का है सुन्दर दरबार जहाँ । भक्त जानो की सब आशाएं होती हैं स्वीकार यहाँ । सब माँ की माया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥ अपनी खुशिया अपने दुखड़े माँ से सांझे कर लूँगा । माँ के आशीर्वाद से अपनी खाली झोली भर लूँगा । यही मन में समाया है, मस्त हवा का एक झोंका यह संदेसा लाया है ॥

श्री वैष्णो माता जी की आरती - Shri Vaishno Mata Ji Ki Aarti

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भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,  हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ । हे दरबारा वाली आरती जय माँ । ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ काहे दी मैया तेरी आरती बनावा, काहे दी पावां विच बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । सुहे चोलेयाँ वाली आरती जय माँ । हे माँ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सोने दी आरती बनावा, अगर कपूर पावां बाती, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ कौन सुहागन दिवा बालेया मेरी मैया, कौन जागेगा सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । सच्चिया ज्योतां वाली आरती जय माँ । हे पहाड़ा  वाली आरती जय माँ ॥ सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी अम्बे, ज्योत जागेगी सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ । हे माँ त्रिकुटा रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा, जिस तेरा भवन बनाया, मंदिर विच आरती जय माँ । हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ । हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥ सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे, जो ध्यावे सो, यो फल पावे, रख बाणे दी लाज, मं...

भजन: प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी - Payara Saja Hai Tera Dvaar Bhawani

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दरबार तेरा दरबारों में, एक ख़ास एहमियत रखता है । उसको वैसा मिल जाता है, जो जैसी नियत रखता है ॥ बड़ा प्यारा सजा है द्वार भवानी । भक्तों की लगी है कतार भवानी ॥ ऊँचे पर्बत भवन निराला । आ के शीश निवावे संसार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥ जगमग जगमग ज्योत जगे है । तेरे चरणों में गंगा की धार, भवानी ॥ तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥ लाल चुनरिया लाल लाल चूड़ा । गले लाल फूलों के सोहे हार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार, भवानी ॥ सावन महीना मैया झूला झूले । देखो रूप कंजको का धार भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥ पल में भरती झोली खाली । तेरे खुले दया के भण्डार, भवानी ॥ तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥ लक्खा को है तेरा सहारा माँ । करदे अपने सरल का बेडा पार, भवानी ॥ प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥

भजन: तेरे सदके तू भेज दे बुलावा - Tere Sadke Tu Bhej De Bulava

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जय माता दी, जय माता दी, सारे बोलो जय माता दी । तेरे सदके तू भेज दे बुलावा, दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरा वालिये । मांगू और क्या मैं इस के इलावा, छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरा वालिये ॥ धरती क्या आकाश है क्या सब तेरे इशारों से चलते हैं । चाँद सितारों के दीपक भी तेरे नूर से ही चलते हैं । हम बन्दों की हस्ती क्या है, तेरी दया पर ही पलते हैं । शेरां वाली, महरा वाली, ज्योतां वाली, लाटा वाली ॥ रोता आये, हस्ता जाए, तेरे दर की रीत यही है । नित नित तेरे दर्शन करना, हम भक्तो की प्रीत यही है । जिस को चाहे उसको बुलाये, मैया तेरी रीत यही है । शेरां वाली, महरा वाली, ज्योतां वाली, लाटा वाली ॥

भजन: शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ - Shakti De Maa Shakti De Maa

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शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ । पग पग ठोकर खाऊं, चल ना पाऊं, कैसे आऊं मैं घर तेरे ॥ हाथ पकड़ ले हाथ बढ़ा दे, अपने मंदिर तक पहुंचा दे । सर पर दुःख की रैना, नाही चैना,  प्यासे नैना दर्शन के ॥ जग में जिसका नाम है जीवन, इक युग है संग्राम है जीवन । तेरा नाम पुकारा, दुःख का मारा, हारा माँ इस जीवन से ॥ तेरे द्वारे जो भी आया, उसने जो माँगा वो पाया । मैं भी तेरा सवाली, शक्तिशाली शेरों वाली माँ जगदम्बे ॥

भजन: माँ शारदे माँ शारदे - Maa Shaarde Maa Shaarde

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माँ शारदे, माँ शारदे । ओ मैया हम तो हैं बालक तेरे ॥ तू है दयालु बड़ी माँ वीणा वादिनी । करती दया हो सब पे अम्बे भवानी । वो मैया विद्या का आके हमको भी भण्डार दे ॥ करदो हमारी आज माँ पूरी आशा । कब से है शर्मा तेरे दर्शन का प्यासा । ओ मैया दर्शन हमे भी आ के माँ एक बार दे ॥ मांगे ना लक्खा तुमसे दौलत खजाना । सात सवारों का मुझको अमृत पिलाना । ओ मैया मेरी ही माता के जैसा बस प्यार दे ॥ स्वर: लखबीर सिंह लक्खा

भजन: माँ की हर बात निराली है - Maa Ki Har Baat Niraali Hai

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पास की सुनती है, दूर की सुनती है, गुमनाम के संग संग मशहूर की सुनती है । माँ तो आखिर माँ है माँ के भक्तो, माँ तो हर मजबूर की सुनती है ॥ माँ की हर बात निराली है, बात निराली है, के हर करामात निराली है, महा दाती से सब को मिली सौगात निराली है ॥ वक़्त की चाल बदले, दुःख की जनझाल बदले, इसके चरणों में झुककर, बड़े कंगाल बदले । यहाँ जो आये सवाली, कभी वो जाए न खली, यह लाती पतझर में भी, हर चमन में हरिआली । काली रातो ने लाती प्रभात निराली है ॥ दया जब इसकी होती, तो कंकर बनते मोती, जिसे यह आप जगादे, ना फिर किस्मत वो सोती । गमो से घिरने वाले, बड़े इस माँ ने संभाले, फसे मझदार में बेड़े, इसी में बाहर निकाले । इसकी मीठी ममता की बरसात निराली है ॥ दुःख ताकती है यह, सुख बांटती है जी, हमे पालती है ये दिनरात ही । जादू इसका अजीब, देखो हो के करीब, यह तो बदले नसीब दिन रात ही । इस की रहमत हर निर्दोष के साथ निराली है ॥

भजन: आये तेरे भवन देदे अपनी शरण - Aaye Tere Bhavan Dede Apni Sharan

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आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण, रहे तुझ में मगन, थाम के यह चरण । तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥ उत्सव मनाये, नाचे गाये, चलो मैया के दर जाएँ । चारो दिशाए चार खम्बे बनी हैं, मंडप में आत्मा की चारद तानी है । सूरज भी किरणों की माला ले आया, कुदरत ने धरती का आँगन सजाया । करके तेरे दर्शन, झूमे धरती पवन, सन नन नन गाये पवन, सभी तुझ में मगन, तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥ फूलों ने रंगों से रंगोली सजाई, सारी धरती यह महकायी । चरणों में बहती है गंगा की धरा, आरती का दीपक लगे हर एक सितारा । पुरवैया देखो चवर कैसे झुलाए, ऋतुएँ भी माता का झुला झुलायें । पा के भक्ति का धन, हुआ पावन यह मन, कर के तेरा सुमिरन, खुले अंतर नयन, तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

भजन: ले के पूजा की थाली ज्योत मन की जगाली - Le Ke Pooja Ki Thaali Jyot Man Ki Jagali

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ले के पूजा की थाली, ज्योत मन की जगाली, तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ । तू जो दे दे सहारा, सुख जीवन का सारा, तेरे चरणों पे वारुण, भोली माँ ॥ धूल तेरे चरणों की ले कर माथे तिलक लगाया । यही कामना लेकर मैया द्वारे तेरे मैं आया । रहूँ मैं तेरा हो के, तेरी सेवा में खो के, सारा जीवन गुजारूं, भोली माँ ॥ सफल हुआ यह जनम के मैं था जन्मो से कंगाल । तुने भक्ति का धन देके कर दिया मालोमाल । रहे जब तक यह प्राण, करूँ तेरा ही ध्यान, नाम तेरा पुकारूं, भोरी माँ ॥

भजन: हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम - He Gau Mata Tumhe Pranaam

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हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम ! मंगलदातृ हे गोमाता,  हम सब करते तुम्हें प्रणाम। दूध दही देती कल्याणी,  और असंख्य हैं तेरे नाम॥ कामधेनु है तु सुरभी है,  विश्वरूप तू सुख का धाम। सर्वरूप हैं तेरे जननी,  तीर्थरूप तू श्यामा श्याम॥ वेदों में है कीर्ति छा रही,  अध्न्या भी है तेरा नाम। परम पवित्र तेजमय तू है,  तुष्टि तुष्टिमय तेरा धाम॥ वृन्दावन में कृष्ण कन्हैया,  तुझे पालते आठों याम। दूध दही मक्खन मिश्री से,  खेल खेलते हैं घनश्याम॥ देश हमारा तब कहलाता,  सुख-समृद्धि का शोभा धाम। घी दूध की नदिया बहतीं,  नहीं गरीबी का था नाम॥ वही स्थिति फिर लाने को,  गो सेवाव्रत लें अविराम। गोरक्षा में जान लगा दें,  पूरण होंगे सारे काम॥ हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम !

नदी और दोस्त - River and Friend (A Motivational Story)

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एक गांव में दो दोस्त रहते थे। एक बार उन्होंने शहर जाकर कुछ काम करने का फैसला किया और शहर के लिए निकल पड़े। गांव के अंत में एक जमी हुई नदी थी। शहर जाने के लिए उन्हें वह नदी पार करनी ही थी। वहां कोई पुल भी नहीं था।  ऐसे में एक दोस्त ने कहा कि नदी पार करना खतरनाक है, इसलिए बेहतर है कि गांव में ही रहें। हालांकि, दूसरा दोस्त कुछ और ही सोच रहा था। उसने मन में निश्चय कर लिया था कि वह किसी भी कीमत पर शहर जाकर ही रहेगा।  अपने इस दृढ़-निश्चय के साथ वह जमी हुई नदी पर आगे बढ़ने लगा। उसका दोस्त किनारे पर खड़ा होकर उसे ऐसा करने से रोक रहा था। वह चिल्ला रहा था कि तुम गिर जाओगे। कुछ कदम चलने के बाद वह लड़का जमी हुई नदी पर फिसल गया।  किनारे खड़े दोस्त ने उसे लौटने के लिए कहा लेकिन वह फिर से खड़ा हुआ और आगे बढ़ने लगा। सावधानी से आगे बढ़ते हुए उसने आखिरकार नदी पार कर ली और शहर की ओर बढ़ गया। वहीं, उसके दोस्त ने नदी पार करने की कोशिश ही नहीं की और वहीं राह गया। मंत्र: अगर आप कुछ ठान लें तो अवश्य ही उसे हासिल कर सकते हैं।

एक बेटा और वृद्ध पिता - A Son and Old Father (A Moral Story)

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एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे खाना खा रहे दूसरे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे, लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया। उनके कपड़े साफ़ किये, उनका चेहरा साफ़ किया, उनके बालों में कंघी की,चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया। सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे। बेटे ने बिल का भुगतान किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा। तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा "क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?" बेटे ने जवाब दिया "नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर नहीं जा रहा।" वृद्ध ने कहा "बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो, प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद (आशा)।" आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसंद नहीँ करते और कहते हैं क्या करोगे आप? आप से चला तो जाता नह...

धर्म और मुक्ति - Religion and Liberation

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शिप्रा नदी के पास बसे एक गांव से एक पंडित रोज नदी को पार कर उज्जैन शहर मे रहने वाले एक धनी सेठ को कथा सुनाने जाता था। पंडित रोज सेठ को कथा सुनाता और बदले में सेठ उसे धन दान देता। ऐसे ही एक दिन जब वह पण्डित सेठ को कथा सुनाने के लिये नदी को पार करके जा रहा था तो उसे एक आवाज सुनाई दी - "कभी हमें भी ज्ञान दे दिया करो।" पण्डित ने इधर-उधर देखा मगर उसे वहां कोई दिखाई नही दिया। उसे फिर अपने पास से ही एक आवाज सुनाई दी - "पण्डित जी मैं यहाँ हूँ।" पण्डित ने देखा कि वह एक घड़ियाल था। पण्डित जी हैरान भी थे घड़ियाल को इंसान की आवाज में बोलते सुनकर और घबराये भी थे। घड़ियाल ने कहा - "पण्डित जी आप डरिये नही आप मुझे कथा सुनाकर ज्ञान प्रदान करे और यह सब मैं मुफ्त में भी नही मांग रहा हूँ। आपकी कथा के बदले में रोज आपको एक अशर्फी मैं दिया करूंगा।" पण्डित को बात जची। पण्डित को तो धन की चाहत थी फिर चाहे वो उसे नदी के उस पार सेठ को कथा सुनाने से मिले या नदी के इस किनारे घड़ियाल को कथा सुनाकर मिले। रोज वह पण्डित घड़ियाल को कथा सुनाता और रोज घड़ियाल पण्डित को एक अशर्फी बदल...

भजन: हे शिवशंकर नटराजा - He Shiv Shankar Natraja

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हे शिवशंकर नटराजा, मैं तो जनम जनम का दास तेरा । निसदिन करता मैं नाम जपन तेरा, शिव शिव शिव शिव गुंजत मन मोरा । तुम हो मरे प्रभु, तुम ही कृपालु, करूँ समर्पण दीन दयालु ।। तोरी जटा से बहती पवित्रता, तीन्ही लोको के तुम हो दाता । डमरू बजाया, तमस भगाया, जड़ चेतन को तुम्ही ने जगाया ।। अलख निरंजन शिव मोरे स्वामी, तुम ही हो मेरे अंतरयामी । भूल जो कोई हुई है मुझ से, क्षमा मैं मांगू हर पल तुझ से ।। लीला से तेरी डोले यह धरती, करे जो भक्ति देता तू मुक्ति । तांडव नृत्य प्रलय करा के, भव सागर तू पर करादे ।। छवि तेरी है सब से सुन्दर, शशि विराजे तेरी जटा में । हार मणि का शोभे गले में चमके जैसे तारे गगन में ।। स्वर: अनूप जलोटा

भजन: रहमत बरसा देना तू फागुन आया है - Rehmat Barasa Dena Tu Phagun Aaya Hai

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रहमत बरसा देना तू फागुन आया है, गंगा के जल को लाने का मौसम आया है। कंधे पे उठा के जल चलते ही जाना है, जल को ले जा के शिवलिंग पे चढ़ाना है, शिव के द्वारे पे सारा संसार आया है। भोले बाबा तेरी यह जुदाई सही जाए ना, बिन तुझको देखे भोले मुझको चैन आये ना, आजाना तू मेरे पास आया मैं दरबार में, कितनी रात गुजारी है तेरे इंतज़ार में, कैसे बताऊँ ओ भोले नाथ मेरे, मैंने श्रद्धा और मन से तुम्हे ध्याया है, सब कुछ छोड़ के आया मैं, फागुन आया है। भक्ति का नशा यह भोले मन में मेरे छाया है, जो भी आज हूँ मैं, भोले सारी तेरी माया है, अँखियाँ कब से तरस रहीं थी तेरे इस दीदार को, आया तेरे चरणो में, भोले मुझको प्यार दो, अब न कभी तू मुझसे होना जुदा, बड़ी मुश्किल से भोले तुझे पाया है, खुशीआं बरसादेना तू, फागुन आया है।

भजन: ॐ नमः शिवाय शिव संभु का महामंत्र है - Om Namah Shivay Shiv Shambhu Ka Mahamantra Hai

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ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय । शिव संभु का महामंत्र है मुक्ति का उपाय ।। जब जब डोले जीवन नैया, शिव की महिमा गावो, सारे जग के वो है खिवैया, शिव की शरण में आवो, संकट छाये कष्ट रुलाये जब जब जी घबराये, कहो ॐ नमः शिवाये ... सबसे प्यारे सबसे न्यारे बाबा भोले भाले है, भांग धतूरे की मस्ती में रहते मस्त निराले हैं, बम बम भोले कहते जावो जी दम आये जाये, हरी ॐ नमः शिवाय... आधा चंद माथे सोहे गाल सर्पो की माला है, तेज धारी के तेज़ से पाए सूरज चाँद उजाला, डम  डम बोले शिव का डमरू सातो स्वर दोहराये, हरी ॐ नमः शिवाय... विपता आई राम पे भारी शिव शंकर का जाप किया, बजरंगी की शक्ति बनकर राम का शिव ने साथ दिया, रामेश्वर की पूजा करके राम यही फरमाये, हरी ॐ नमः शिवाय...

आम का पेड़ - The Tree of Mango (A Heart Touching Story)

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एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। पेड के उपर चढ़ता, आम खाता, खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया। बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया। आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता। एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा- "तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।" बच्चे ने आम के पेड से कहा- "अब मेरी खेलने की उम्र नही है। मुझे पढना है, लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।" पेड ने कहा- "तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे। इससे जो पैसे मिले उससे अपनी फीस भर देना।" उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया। उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया। आम का पेड उसकी राह देखता रहता। एक दिन वो फिर आया और कहने लगा- "अब मुझे नौकरी मिल गई है, मेरी शादी भी हो चुकी है, मुझे मेरा अपना ...