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क्यों होते हैं शादी कार्ड पर श्री गणेश विराजमान - Why is Shri Ganesh on marriage card?

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श्री गणेश पूजा अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति, स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो। जब कभी किसी व्यक्ति को किसी अनिष्ट की आशंका हो या उसे शारीरिक या आर्थिक कष्ट उठाने पड़ रहे हो तो ऐसे में उसे श्री गणेश की आराधना करने को कहा जाता है।  श्री गणेश को सभी दुखों को हरने वाला या दुखहर्ता माना गया है। श्री गणेश बुद्धि के देवता हैं। इसीलिए श्री गणेश प्रथम पूज्य है यानि हर शुभ कार्य में गणेशजी की पूजा सबसे पहले की जाती है क्योंकि उनके स्वरूप में अध्यात्म और जीवन के गहरे रहस्य छुपे हैं। जिनसे हम जीवन प्रबंधन के सफल सूत्र हासिल कर सकते हैं। इसी तरह श्री गणेश की छोटी आंखें मानव को जीवन में सूक्ष्म दृष्टि रखने की प्रेरणा देती हैं। उनकी बड़ी नाक (सूंड) दूर तक सूंघने में समर्थ है जो उनकी दूरदर्शिता को बताती है। जिसका अर्थ है कि उन्हें हर बात का ज्ञान है। श्री गणेश के दो दांत हैं एक पूर्ण व दूसरा अपूर्ण। पूर्ण दांत श्रद्धा का प्रतीक ह...

क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा ? - Why do Worship Lord Ganesha ?

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क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा? भगवान गणेश को सभी अच्‍छे गुणों और सफलताओं का देवता माना जाता है इसीलिए लोग हर अच्‍छे काम को करने से पहले गणेश जी की पूजा करना शुभ मानते हैं। भगवान गणेश के जन्‍मदिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग, आध्‍यात्मिक शक्ति के लिए, कार्य सिद्धि के लिए और लाभ प्राप्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन धूमधाम से करते है। भगवान गणेश को सभी दुखों का हर्ता, संकट दूर करने वाला,  सदबुद्धि देने वाला माना जाता है। उनकी पूजा करने से आध्‍यात्मिक समृद्धि मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती है।  भगवान गणेश के हर रूप की पूजा, विशिष्‍ट व्‍याख्‍या प्रदान करती है। भगवान गणेश की पूजा करने वाले लोगों के कई मत होते है। लोगों द्वारा भगवान गणेश की पूजा सर्वप्रथम करने और उसके पीछे के कारणों को जानना बेहद रोचक होता है। आज हम आपको कुछ महत्‍वपूर्ण और रोचक तथ्‍य बता रहे हैं कि किसी भी समारोह, उत्‍सव या अनुष्‍ठान में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्‍यों की जाती है? बाधाओं को दूर करते हैं हिंदू धर्म के सभी अनुयायियों का मानना है कि किसी भी नए का...

श्री गणेश चालीसा - Shri Ganesh Chalisa

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॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल । विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभ काजू ॥ जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायक बुद्घि विधाता ॥ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥ राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥ धनि शिवसुवन षडानन भ्राता । गौरी ललन विश्वविख्याता ॥ ऋद्घिसिद्घि तव चंवर सुधारे । मूषक वाहन सोहत द्घारे ॥ कहौ जन्म शुभकथा तुम्हारी । अति शुचि पावन मंगलकारी ॥ एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी ॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा ॥ अतिथि जानि कै गौरि सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥ अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥ मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला । बिना गर्भ धारण, यहि काला ॥ गणनायक, गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम, रुप भगवाना ॥ अस कहि अन्तर्धान रुप है । पलना पर...

श्री गणेश जी की आरती - Shri Ganesh Ji Ki Aarti

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जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय गणेश... एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी । माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश... पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश... अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय गणेश... दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी । कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥ जय गणेश... हार चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा । 'सूरश्याम' शरण आए, सुफल कीजे सेवा ॥ जय गणेश... विध्न - हरण मंगल - करण, काटत सकल कलेस । सबसे पहले सुमरिये गौरीपुत्र गणेश ॥